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Nematodes

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10
Aug

लेशिअन निमेटोड के समूह पर नियंत्रण

1.फेसिओलस रेडिएटस के साथ जुताई या चक्रीकरण से जड़-घाव के निमेटोड में कमी हुई।
2. नीम के केक ने निमेटोड की आबादी में सबसे अधिक कमी की।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड का रासायनिक नियंत्रण

1. प्रभावित फसलों के साथ मिट्टी में कार्बोफ्यूरान या फोरेट का 1 किलो ए.आइ. प्रति हेक की दर से अनुप्रयोग निमेटोड के घाव को कम करता है और अनाज की पैदावार में नुकसान को 48.5% तक कम करता है।
2. चूंकि लेशिअन निमेटोड द्वारा नुकसान मौसम के दौरान देरी से प्रकट होता है, रासायनिक उपचार जल्दी बोयी गयी फसल के लिए कारगर नहीं हो सकता।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड द्वारा उपज को नुकसान

1. भारत में वजह पी. ज़ी और पी. इंडिकस द्वारा संक्रमण की वज़ह से उपज को नुकसान क्रमशः 13-29% और 33% होता है।
2. उपज का नुकसान मुख्य रूप से गुठली के कम भराव और वजन में कमी के कारण होता है।
3. निमेटोड का संक्रमण दानों में प्रोटीन की मात्रा भी कम करता है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड का जीवन चक्र

1. पी. इंडिकस को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 33-34 दिनों की जरूरत होती है और एक ही फसल में कई अतिव्यापी पीढ़ियां होती हैं।
2. निमेटोड एक चयनित बिंदु पर अकेले या समूहों में पौधे की जड़ों पर हमला करता है। प्रवेश पाने के बाद निमेटोड कोर्टिकल कोशिकाओं से भोजन लेता है और दीर्घाएं बनाता है।
3. संक्रमित जडों में पानी सोखने से घाव उत्पान होते हैं और कभी-कभी सूजन भी दिखाई देती है।
4. परिगलित गुच्छे संगठित हो जाते हैं और काले से लेकर भूरे रंग के घाव विकसित करते हैं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड की क्षति के लक्षण

1.निमेटोड से संक्रमित पौधों का विकास अवरुद्ध हो जाता है, यहां तक कि दब जाता है जिससे खेतों में अलग-अलग खण्डों में वृद्धि होती है। पत्तियों का क्लोरोसिस तथा इअर हेड्स व दानों की संख्या में कमी भी देखी जाती है।
2. निमेटोड से संक्रमित जडों में घावों द्वारा पानी सोखे जाने के कारण सूजन दिखाई देती है जिससे जड़ की सतह पर काले नेक्रोटिक घाव विकसित होते हैं।
3. क्षति के उन्नत चरण में, घाव एक दूसरे से मिल जाते हैं जिससे पूरी जड काले रंग की हो जाती है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड के मेज़बानों का विस्तार

1. चावल पी. इंडिकस निमेटोड का एक मुख्य मेजबान है।
2. साइपेरस इरिआ तथा एलेयूसिन इंडिका (एल.) गर्टन भी पी.इंडिकस तथा पी.ज़ी निमेटोड्स के लिए मुख्य मेजबान हैं।
3. घास प्रजाति अर्थात्., साइनोडोन डेक्टिलोन, अमारेंथस स्पाइनोसस एल., डेक्टिलोटेनिअम ईजिप्टिकम (डेस्फ.) बिउव, डिजिटारिअ सेंगिनिलिस स्कोप. तथा एकिनोक्लोआ स्प. भी निमेटोड के मेजबान होते हैं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन (घाव) निमेटोड का फैलाव

1. लेशिअन निमेटोड व्यापक रूप से दुनिया भर में फैले हुए हैं और मुख्य रूप से प्रत्यक्ष तरीके से बोए गए वर्षा से सिंचित चावल को नुकसान पहुँचाते हैं।
2. भारत में , प्राटिलिंकस एसपीपी., विशेष रूप से पी.इंडिकस तथा पी.ज़ी आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, केरल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के चावल में दर्ज किया गया है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन (घाव) निमेटोड (प्राटिलेंकस एसपीपी.)

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति डीआरआर
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड का रासायनिक नियंत्रण

• थायोबेंडेज़ॉल, बेनोमाइल या फेनिट्रोथायोन से बीजोपचार ने निमेटोड की जनसंख्या को काफी कम कर दिया।
• गर्म पानी के उपचार के साथ बीज को पहले से ऑग्ज़ेमाइल में भिगोने पर पर्याक्रमण कम हुआ और पैदावार में वृद्धि हुई।
• सोवियत संघ में पारे के कार्बनिक जैविक यौगिकों ग्रेनोज़ान तथा हाइड्रोजन परोक्साइड द्वारा चावल के पूर्व बुवाई उपचार ने चावल के पैनिकल्स में ए.बेस्सेयि के पर्याक्रमण को कम किया, राइस स्टेंड्स के घनत्व को 10-11% से बेहतर किया और पैदावार में 13-36% से वृद्धि की।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड के संवर्धन के विधियां

1. बुवाई के बाद खेत में जलभराव की स्थिति की तुलना में खेत में प्रत्यक्ष बुवाई करने पर निमेटोड की वजह से नुकसान कम होता है (सिल्वा और डी सिल्वा, 1992)।
2. नर्सरी में बुवाई के पूर्व पहले से भिगोए गए चावल के बीज को पानी की भरपूर मात्रा से अच्छी तरह धोने पर सक्रिय निमेटोड को कम कर, इस निमेटोड के कारण नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।

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10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड का भौतिक नियंत्रण

1. नियंत्रित गैस (97.5% नाइट्रोजन और 2.5% ऑक्सीजन) के माध्यम में 25 oC पर 10 दिनों के लिए ए.बेस्सेयि से पीड़ित बीज का संग्रहण निमेटोड पर प्रभावी नियंत्रण करता है।
2. इथोप्रोफ़ॉस 20ईसी के 0.5% या गर्म पानी से 15 मिनट के लिए 53-54 oC पर उपचार ने बीज में निमेटोड नेमाटोड के पर्याक्रमण को लगभग मुक्त स्तर तक कम कर दिया (टेस्कोनी व अन्य, 1999)।
3. गर्म पानी के उपचार के अलावा, बीज उपचार तथा बेनोमाइल से छिडकाव की सन्युक्त क्रिया, ए.बेस्सेयि के पर्याक्रमण से चावल के पौधों की रक्षा करती है।

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10
Aug

मेज़बान पौधे का सफेद-सिरे के निमेटोड के लिए प्रतिरोध

1. ए.बेस्सेयि के लिए निमेटोड मुक्त या प्रतिरोधी रोपण सामग्री का उपयोग सबसे प्रभावी नियंत्रण पद्धति है (सिल्वा और डी सिल्वा, 1992)।
2. ब्राज़ील में ए.बेस्सेयि से टीकाकरण किए जाने पर ब्लूबेल्ले, बीआर-आइआरजीए 409 तथा आइआरजीए 172 एफ4 एसएस39 जिसे चावल के चावल के जीनोटाइप ने सफेद सिरे के कोई लक्षण नहीं दर्शाए (ओलिवेरिआ व ओलिवेरिआ, 1989)।
3. सोवियत संघ में, पिछले 40 वर्षों के दौरान व्युत्पन्न के प्रोजेनिटर्स अर्थात फॉर्चुना, निरा, रेक्सोरो व ब्लूबोनेट के इस्तेमाल से, ए.बेस्सेयि व अन्य विभिन्न रोगों के लिए बहु-प्रतिरोधी एक उल्लेखनीय व्युत्पन्न (डेरिवेटिव) बोनट 73 विकसित किया गया।

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10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड द्वारा उपज को नुकसान

1.निमेटोड के पर्याक्रमण की वज़ह से विकसित तुषमय इअर हेड्स से उपज का नुकसान 20% था। (मुथुकृष्णन व अन्य, 1974)।
2. आंशिक रूप से भरे हुए दानों के साथ इअर हेड्स को निमेटोड के कारण क्षति 21-46% तक थी (नन्दकुमार व अन्य, 1975)।

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10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड पर पर्यावरणीय कारकों का प्रभाव

1. निमेटोड 13-42°C तापमान तथा 70% से ऊपर आदर्श सापेक्ष आर्द्रता पर सक्रिय होते हैं।
2. 60°C पर ए.बेस्सेयि का अस्तित्व 40% था इसलिए चावल बीज का अंकुरण प्रभावित नहीं हुआ।
3. निमेटोड चावल के दानों में ग्लुम्स और दाने के बीच 1 साल तह जीवित रह सकते हैं, और पानी में 10°C पर 53 दिनों तक।
4. निमेटोड की गतिविधि के लिए न्यूनतम अनुकूल तापमान 4°C होता है और तापमान से मृत्यु का बिन्दु 10 मिनट के लिए 49°C है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

अन्य जीवों और रोग की जटिलताओं के साथ सफेद-सिरे के निमेटोड का परस्पर व्यवहार

1.रोगजनक फफून्द एक्रोसिलिंड्रिकम ऑर्ज़ी तथा डोर्टिसिअम ससकी निमेटोद से प्रभावित पत्ती के अंतर्नाडी हिस्सों पर आक्रमण करती है (राव और राव, 1979)।
2. बूट की अन्दरूनी परतों में निमेटोड के भोजन तथा नमी में वृद्धि के कारण पैनिकल के उद्भव में देरी से फ्यूज़ेरिअम एसपीपी जैसे अवसरवादी फफून्दों के संक्रमण में आसान वृद्धि हुई।

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10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड के मेज़बान-परजीवी सम्बन्ध

1. चावल के पौधों के विकास की प्रारम्भिक अवस्था में ए.बेस्सेयि एंडो-परजीवी तरीके से 7-10 दिनों तक कोलिओप्टाइल में भोजन लेता है और बाद में पौधों की वृद्धि के चरणों के दौरान पत्ती के सबसे अन्दरूनी आवरण के भीतर एक्टो-परजीवी तरीके से।
2. टिलरिंग की विलम्बित अवस्था में, निमेटोड की संख्या तेज़ी से बढ सकती है, और पौधे के प्रजनन चरण के दौरान एक चोटी तक पहुँच सकती है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड का जीवनचक्र

1. ए.बेस्सेयि उभयलिंगी और एक एक्टोपरजीवी निमेटोड और उसे अपना जीवनचक्र पूर्ण करने के लिए 6-7 दिन की जरूरत होती है। जीवन चक्र की अवधि पारस्थिकीय कारकों के अनुसार बदल सकती है अर्थात 31.8oC पर 3 दिन से लेकर 14.7oC पर 29 दिन (तिकिनोवा 1966)।
2. एक अंडे से दूसरे अंडे के लिए जीवनचक्र की अवधि केलगभग 6 से 7 दिन होती है। प्रकृति में, जीवन चक्र की लंबाई पारिस्थितिकीय कारकों पर निर्भर करती है और इस जीवन चक्र को पूर्ण करने के लिए 3 दिन (31.80क) से लेकर 29 दिन (14.70से पर)( लग सकते हैं (तिखिनोवा, 1966)

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड द्वारा नुकसान के लक्षण

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति डीआरआर
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड के मेज़बानों का विस्तार

1. चावल स्ट्रॉबेरी, और रजनीगंधा सफेद-सिरे के निमेटोड के मुख्य मेजबान हैं।

2. मेजबान के विस्तार में उच्च पौधों की 35 से अधिक पीढियां शामिल हैं (फॉर्च्यूनर और विलियम्स, 1975)

3. जंगली चावल की प्रजातियों अर्थात्, ऑरिज़ा ब्रेविलिगुलाटा ए. चेय एट रोर, ओ.ग्लेबर्रिमा सामान्य घास फूस जैसे कि साइपरस इरिआ एल., सेटारिआ विरिडिस (एल.) बेआउव, पैनिकम सेंगिनल।

4. मक्का, बाजरा और इतालवी बाजरा जैसी खाद्य फसलें (डेव, 1982), डायोस्कोरिआ ट्रिफिडा एल., तथा आम इपोमी बटाटास (एल.) पॉइर।

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सफेद-सिरे का निमेटोड अफेलेंकॉइडेस बेस्सेयि (क्रिस्टी, 1942)
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड का वितरण

1. सफेद-सिरे का निमेटोड, ए.बेस्सेयि व्यापक रूप से व्याप्त है और अब दुनिया के चावल उगाने वाले अधिकांश क्षेत्रों में पाया जाता है (ऑउ, 1985) जिनमें शामिल हैं ऑस्ट्रेलिया, सीलोन, कोमोरो द्वीप समूह, क्यूबा, अल साल्वाडोर, हंगरी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेडागास्कर, मैक्सिको,पाकिस्तान, फिलीपींस, ताइवान, थाईलैंड, अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ और मध्य तथा पश्चिमअफ्रीका के अधिकांश देश (फ्रैंकलिन और सिद्दिकी, 1972)।

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सफेद-सिरे का निमेटोड अफेलेंकॉइडेस बेस्सेयि (क्रिस्टी, 1942)
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