Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

Non Insects

Non Insects
3
Sep

Fumigation for control of rodents कृंतकों के नियंत्रण के लिए धूम्रीकरण (या धूमन)

1. कृंतकों के नियंत्रण स्वदेशी स्मोक जेनरेटर का भी फसल की वृद्धि के दौरान प्रभावशाली तरीके से खेत में या नालियों के मेड़ पर और खेत के फार्म के अन्दर बने रास्तों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. एल्युमिनियम फॉस्फाइड जैसे धूमक प्रभावी होता है और इसका प्रयोग बिलों में रहने वाले खेत के कृंतकों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। पंजाब के खेतों में Bandicota bengalensis के लिए इसके आकलन में पाया गया कि इसकी मारण क्षमता 66.6% है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
Sep

Poison baiting for control of rodents कृंतकों के नियंतरण के लिए विष प्रलोभन

1. कृंतकनाशी दवा के एकल डोज का प्रयोग करने की स्थिति में पूर्व-प्रलोभन जरूरी होता है। 2. जिंक फॉस्फाइड एक पारंपरिक एकल डोज वाला कृंतक विष है। ब्रोमोडायलोन एकमात्र ऐसी कृंतकनाशी दवा है जो एंटीकॉग्युलेंट है। 3. प्रलोभन के लिए जिंक फॉस्फाइड को मूंगफली के तेल और कुचले हुए गेहूं या चावल के साथ भार के हिसाब से 2 g: 2g: 96 g की दर से मिलाना चाहिए। 4. ब्रोमोडायलोन एकल डोज वा एंटीकॉग्युलेंट है और इसे नारियल-चावल की सम्मिलित कृषि उत्पादन प्रणाली के तहत नारियल के पेड़ों की फुनगी पर रखा जा सकता है। 5. रोबन जैसा प्रयोग के लिए तैयार नुस्खा भी बाजार में 0.25% के सान्द्रण पर उपलब्ध है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
Sep

cultural control of rodents कृंतकों का सांस्कृतिक नियंत्रण

कृंतकों का सांस्कृतिक नियंत्रण

1. खेत का आकार बड़ा रखें और मेड़ों को छोटा।

2. फसल में और मेड़ों पर खरपतवार को नियंत्रित रखें ताकि चूहों को अलग से कोई भोजन उपलब्ध न हो।

3. संभव हो तो एक साथ बड़े इलाके में धान का रोपन।

4. बांस की कमानी वाली चूहेदानी फसल में कल्ले फूटने की अवस्था में बहुत प्रभावी होता है।

5. खेत में चिड़यों के बैठने के लिए संरचना बनाकर उल्लू जैसे पक्षियों द्वारा कृंतकों का शिकार करवाया जा सकता है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
Sep

Rodent control in rice चावल में कृंतक-नियंत्रण

1. प्रभावी कृंतक प्रबंधन के लिए एकीकृत रूप से सामुदायिक तौर पर चूहेदानियों, विष-प्रलोभन, धूम्रीकरण (धूमन) और सांस्कृतिक नियंत्रण विधियों, जैसे- फसल चक्रण, मेड़ों की सफाई आदि का सहारा लिया जा सकता है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
Sep

Rodents damage at grain storage भंडारित अनाज में कृंतकों का प्रकोप

1. चूहे अपने शारीरिक भार के 10% के बराबर अनाज रोज चट कर जाते हैं।

2. चूहों के कारण हापुर के आसपास के गांवों में सालाना 1.36-3.59 टन अनाज की क्षति होती है।

3. कृंतकों द्वारा न केवल अनाज खाया जाता है बल्कि जितना वे खाते हैं उसका 20 गुना अधिक अनाज को प्रादूषित कर देते हैं। भंडारित अनाज का 2.5% कृंतकों के द्वारा नष्ट किया जाता है।

4. कृंतक अनाज को खराब करते हैं, अपने मल-मूत्र और बालों से अनाज को दूषित करते हैं और कभी-कभी तो मरे हुए चूहों से भी अनाज प्रदूषित होता है।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
3
Sep

Rodents damage at Main field मुख्य खेत में कृंतकों का प्रकोप

1. कभी-कभी रोपे गए बिचड़े को भी कृंतकों द्वारा उखाड़ा और काट दिया जाता है जिस कारण मुख्य खेत में खाली स्थान बन जाते हैं।

2.. आमतौर पर उनकी गतिविधियां खेत के भीतरी भागों में- चारों ओर से 2-4 मी. छोड़कर- देखी जाती है।

3. शुरू में, फसल का नुकसान पट्टियों के रूप में दिखाई पड़ते हैं लेकिन बाद ये पट्टियां फैलते-फैलते एक बड़ी पट्टी का रूप ले लेती है। पुष्पगुच्छ के निकलने पर नुकसान की मात्रा बढ़ जाती है और यह पुष्पगुच्छों के विकसित होने तक जारी रहता है।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
3
Sep

Rodents damage at nursery stage नर्सरी अवस्था में कृंतकों से क्षति

1. नर्सरी अवस्था में कृंतकों से क्षति सबसे अधिक तब पहुंचती है जब बीज में अंखुए फूटते हैं।

2. इस अवस्था में, नर्सरी से पानी निकाल दिया गया होता है और बीज शैय्या पर कृंतक आजादी से घूम-घूमकर अंकुराए बीजों को नुकसान पहुंचाते हैं। बाद में, वे जल की सतह से 1-2 इंच ऊपर बिचड़े को भी काट देते हैं।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
2
Sep

Rodents damage at differnt stages विभिन्न चरणों में

1. अनुमान किया जाता है कि भारत में कृंतकों से चावल के उपज को 5-10% तक क्षति पहुंचती है। मौसम, स्थान और पारितंत्र के अनुसार क्षति की मात्रा भिन्न-भिन्न होतीहै।
2. खेत में लगी फसलों में चावल की फसल को कृंतकों द्वारा सबसे अधिक हानि पहुंचती है। 2-90% तक नुकसान होता है। कृंतक किसी भी किस्म को नहीं छोड़ते और फसल पर उनका हमला किसी भी अवस्था में, किसी भी मौसम में हो सकता है।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
2
Sep

Types of rodents कृंतकों के प्रकार

चूहों के कई प्रकार होते हैं

1. लेसर बैंडिकूट चूहा: Bandicota bengalensis

2.खेत वाले मूस: Mus boodga

3.भारतीय गर्बिल(हिरनमूस): Tatera indica

4.मुलायम बालों वाले खेत वाले मूस : Rattus meltada

5. आन्ध्रप्रदेश के सिंचित परिस्थिति वाले तटीय जिलों में Bandicota bengalensis एवं Mus booduga ऐसे दो कृंतक हैं जो धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।

File Courtesy: 
भंडारित अनाज के पीड़क जंतु और उनका प्रबंधन, IGSMARI – हैदराबाद
2
Sep

Rodents कृंतक

1. गण के जंतु होते हैं जिनके अंतर्गत चूहे और मूस आते हैं।

2. चूहे Muride कुल के जीव हैं।

3. अनुमान है कि विश्व में कुल अनाज उत्पादन का 1% चूहे चट कर जाते हैं। विकासशील देशों में यह इनके द्वारा अनाज की बरबादी 3.5% अनुमानित है।

4 . कृंतकों द्वारा मानव में टायफाइड, पाराटायफाइड और स्कैबीज जैसे लगभग 50 प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं।

File Courtesy: 
भंडारित अनाज के पीड़क जंतु और उनका प्रबंधन, IGSMARI – हैदराबाद
10
Aug

लेशिअन निमेटोड के समूह पर नियंत्रण

1.फेसिओलस रेडिएटस के साथ जुताई या चक्रीकरण से जड़-घाव के निमेटोड में कमी हुई।
2. नीम के केक ने निमेटोड की आबादी में सबसे अधिक कमी की।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड का रासायनिक नियंत्रण

1. प्रभावित फसलों के साथ मिट्टी में कार्बोफ्यूरान या फोरेट का 1 किलो ए.आइ. प्रति हेक की दर से अनुप्रयोग निमेटोड के घाव को कम करता है और अनाज की पैदावार में नुकसान को 48.5% तक कम करता है।
2. चूंकि लेशिअन निमेटोड द्वारा नुकसान मौसम के दौरान देरी से प्रकट होता है, रासायनिक उपचार जल्दी बोयी गयी फसल के लिए कारगर नहीं हो सकता।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड द्वारा उपज को नुकसान

1. भारत में वजह पी. ज़ी और पी. इंडिकस द्वारा संक्रमण की वज़ह से उपज को नुकसान क्रमशः 13-29% और 33% होता है।
2. उपज का नुकसान मुख्य रूप से गुठली के कम भराव और वजन में कमी के कारण होता है।
3. निमेटोड का संक्रमण दानों में प्रोटीन की मात्रा भी कम करता है।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड का जीवन चक्र

1. पी. इंडिकस को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 33-34 दिनों की जरूरत होती है और एक ही फसल में कई अतिव्यापी पीढ़ियां होती हैं।
2. निमेटोड एक चयनित बिंदु पर अकेले या समूहों में पौधे की जड़ों पर हमला करता है। प्रवेश पाने के बाद निमेटोड कोर्टिकल कोशिकाओं से भोजन लेता है और दीर्घाएं बनाता है।
3. संक्रमित जडों में पानी सोखने से घाव उत्पान होते हैं और कभी-कभी सूजन भी दिखाई देती है।
4. परिगलित गुच्छे संगठित हो जाते हैं और काले से लेकर भूरे रंग के घाव विकसित करते हैं।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड की क्षति के लक्षण

1.निमेटोड से संक्रमित पौधों का विकास अवरुद्ध हो जाता है, यहां तक कि दब जाता है जिससे खेतों में अलग-अलग खण्डों में वृद्धि होती है। पत्तियों का क्लोरोसिस तथा इअर हेड्स व दानों की संख्या में कमी भी देखी जाती है।
2. निमेटोड से संक्रमित जडों में घावों द्वारा पानी सोखे जाने के कारण सूजन दिखाई देती है जिससे जड़ की सतह पर काले नेक्रोटिक घाव विकसित होते हैं।
3. क्षति के उन्नत चरण में, घाव एक दूसरे से मिल जाते हैं जिससे पूरी जड काले रंग की हो जाती है।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन निमेटोड के मेज़बानों का विस्तार

1. चावल पी. इंडिकस निमेटोड का एक मुख्य मेजबान है।
2. साइपेरस इरिआ तथा एलेयूसिन इंडिका (एल.) गर्टन भी पी.इंडिकस तथा पी.ज़ी निमेटोड्स के लिए मुख्य मेजबान हैं।
3. घास प्रजाति अर्थात्., साइनोडोन डेक्टिलोन, अमारेंथस स्पाइनोसस एल., डेक्टिलोटेनिअम ईजिप्टिकम (डेस्फ.) बिउव, डिजिटारिअ सेंगिनिलिस स्कोप. तथा एकिनोक्लोआ स्प. भी निमेटोड के मेजबान होते हैं।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन (घाव) निमेटोड का फैलाव

1. लेशिअन निमेटोड व्यापक रूप से दुनिया भर में फैले हुए हैं और मुख्य रूप से प्रत्यक्ष तरीके से बोए गए वर्षा से सिंचित चावल को नुकसान पहुँचाते हैं।
2. भारत में , प्राटिलिंकस एसपीपी., विशेष रूप से पी.इंडिकस तथा पी.ज़ी आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, केरल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के चावल में दर्ज किया गया है।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

लेशिअन (घाव) निमेटोड (प्राटिलेंकस एसपीपी.)

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
Image Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति डीआरआर
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड का रासायनिक नियंत्रण

• थायोबेंडेज़ॉल, बेनोमाइल या फेनिट्रोथायोन से बीजोपचार ने निमेटोड की जनसंख्या को काफी कम कर दिया।
• गर्म पानी के उपचार के साथ बीज को पहले से ऑग्ज़ेमाइल में भिगोने पर पर्याक्रमण कम हुआ और पैदावार में वृद्धि हुई।
• सोवियत संघ में पारे के कार्बनिक जैविक यौगिकों ग्रेनोज़ान तथा हाइड्रोजन परोक्साइड द्वारा चावल के पूर्व बुवाई उपचार ने चावल के पैनिकल्स में ए.बेस्सेयि के पर्याक्रमण को कम किया, राइस स्टेंड्स के घनत्व को 10-11% से बेहतर किया और पैदावार में 13-36% से वृद्धि की।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
Aug

सफेद-सिरे के निमेटोड के संवर्धन के विधियां

1. बुवाई के बाद खेत में जलभराव की स्थिति की तुलना में खेत में प्रत्यक्ष बुवाई करने पर निमेटोड की वजह से नुकसान कम होता है (सिल्वा और डी सिल्वा, 1992)।
2. नर्सरी में बुवाई के पूर्व पहले से भिगोए गए चावल के बीज को पानी की भरपूर मात्रा से अच्छी तरह धोने पर सक्रिय निमेटोड को कम कर, इस निमेटोड के कारण नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
Syndicate content
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies