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Diseases

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12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक का रोग चक्र

1. प्राथमिक संक्रमण संक्रमित बीजों के जरिए होता है।

2. द्वितीयक संक्रमण वर्षा तथा सींचाई के पानी के जरिए होता है और यह स्वस्थ तथा रोगग्रस्त पौधों के संपर्क में आने से भी उत्पन्न होता है।

3. बैक्टीरिया स्टोमेटा से होकर पोषक उत्तक में प्रवेश करता तथा पैरेन्काइमैटस उत्तक में वृद्धि करते हैं।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल ( डॉ. कृष्णवेणी
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक के वैकल्पिक पोषक पौधे

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक के वैकल्पिक पोषक पौधे जंगली चावल की प्रजातियां होती हैं, जो निम्नलिखित हैं: 

• Oryza spontanea, 

• O. perennis balunga, 

• O. nivara, 

• O. breviligulata,

• O. glaberrima, and 

• Leersia hexandra Sw. (साउदर्न कटग्रास) .

 

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/ricedoctor /index.php?option=com_content &view=arti cle&id=554&Itemid=2759
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक के पूर्व प्रवृत्त कारक

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक के विकास को बढ़ावा देने वाले कारकों में निम्न शामिल हैं:

1. तेज हवा, भारी वर्षा तथा गहरा पानी। 

2. उच्च तापमान तथा आर्द्रता 

3. पत्तियों तथा जल में जीवाणुओं की उपस्थिति।  

4. इनोकुलम के स्रोत (अवांछित पौधे, संक्रमित पुआल, खर-पतवार इत्यादि.).

5. उर्वरकों की उच्च मात्रा का इस्तेमाल (नाइट्रोजन का अत्यधिक इस्तेमाल)। प्रतिरोपण के दौरान गलत प्रबंधन (जख्मी पत्तियां)

6. पौधों के बीच कम दूरी छोड़ना (पौधों के बीच बार-बार उत्तक संपर्क होना)

 

File Courtesy: 
http://www.agribusinessweek.com/bacter ial-leaf-streak-of-rice/
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक का सामान्य रोगाणु

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक का सामान्य रोगाणु है Xanthomonas oryzae pv. Oryzicola.

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल ( डॉ. कृष्णवेणी
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक के लक्षण

चावल के बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक के लक्षण :

1. मौसम में यह रोग पत्तियों पर देर से दिखाई पड़ता है, जिसमें अंतरशिरा वाली, पारभासी, जल अवशोषित संकरी लकीर उभरती है, जो धीरे-धीरे जैतून के रंग वाले भूरे रंग में बदल जाती है।

2. पत्ती की शिख की ओर लकीरों की संख्या अधिक रहती है, जो आपस में मिल जाती हैं और इस प्रकार पत्ती की समय पूर्व मृत्यु हो जाती है।

3. लकीरों के दोनों किनारों पर हल्के अंबर के रंग के बैक्टीरियल पिंड उभरते हैं, जो बाद में सूखकर पपड़ियों में बदल जाते हैं।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/ricedoct or/index.php?option=com_content &view =article&id=554&Itemid=2759
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक का आर्थिक महत्व

1. बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक से होने वाला नुकसान 5-30% की मात्रा में देखा गया है।

2. फिलीपिंस में इससे होने वाला नुकसान गर्मी या ठंडी के मौसम किसी में भी काफी बड़ा नहीं था (ओपिना तथा एक्स्कोंडे, 1971)।

3. आम तौर पर बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट की तुलना में कम महत्वपूर्ण माना जाता है।

File Courtesy: 
http://www.eppo.org/QUARAN TINE/bacteria/Xanthomonas_ory zae/XANTOR_ds.pdf
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक का वितरण तथा मौजूदगी

1. बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक व्यापक रूप से ताइवान, दक्षिणी चीन, दक्षिण एशियाई देशों, भारत तथा पश्चिमी अफ्रीका के देशों में पाया जाता है।

2. यह रोग बीजों के जरिए फैलता है।

3. संक्रमित बीजों का इस्तेमाल से, जो रोगग्रस्त खेतों से लिए जाते हैं, रोगग्रस्त बिचड़े पैदा करते हैं।

4. जल में उपस्थित बैक्टीरिया या कटाई के बाद के कचरों में उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया अगले फ़सल मौसम के इनोकुलम के स्रोत होते हैं।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.o rg/ricedoctor/index.php?option=co m_content &view=article&id=554&Itemid=2759
12
Sep

बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक

1. चावल का बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक प्रायः इस फ़सल के टिलरिंग अवस्था में देखा जाता है।

2. यदि बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक बाद की विकास अवस्था में उत्पन्न होती है, तब पौधा इससे आसानी से छुटकारा पा सकता है तथा दाने को कम से कम हानि होती है।

3. यह रोग समशीतोष्ण क्षेत्रों के देशों में नहीं देखा जाता, जिनमें जापान भी शामिल है। इस रोग से होने वाली उपज हानि में 32.3% तक की हानि देखी गई है।

File Courtesy: 
http://agropedia.iitk.ac.in/?q= content /baterial-leaf-streak-bls-rice
12
Sep

आयस्पॉट के प्रबंधन विकल्प

आयस्पॉट रोग को केवल रोग प्रतिरोधी किस्मों की खेती द्वारा रोका जा सकता है।

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12
Sep

आयस्पॉट का वैकल्पिक पोषक पौधे

• आयस्पॉट का वैकल्पिक पोषक पौधे Cynodon dactylon तथा Eleusine indica हैं।

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google book
12
Sep

आयस्पॉट के पूर्व प्रवृत्त कारक

आयस्पॉट रोग को बढ़ावा देने वाला कारक निम्न है :

1. पत्ती का लंबा गीलापन

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12
Sep

आयस्पॉट का सामान्य रोगाणु

आयस्पॉट का सामान्य रोगाणु "Drechslera gigantean है। '

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http://www.apsnet.org/publicat ions/PlantDisease/BackIssues/ Documents/1980Abstracts/PD_64_878.htm
12
Sep

आइस्पॉट के लक्षण

आइस्पॉट रोग के लक्षण:

1. पत्तियों पर पानी से भींगा धब्बा दिखाई पड़ता है और बाद में बिंदुनुमा संरचना या छल्ले जैसी आकृति उभर आती है। 

2. नए धब्बे के चारों ओर एक पीले रंग की संरचना बन जाती है, पर बाद में वह गायब हो जाती है। 

3. बाद में धब्बे छोटे, लंबवत रूप में, अंडाकार जख्म में बदल जाते हैं, जिनमें सफेद से लेकर पुआल के रंग के नेक्रोटिक केंद्र होते हैं, जो संकरे गहरे भूरे किनारे से घिरे रहते हैं।  

 

File Courtesy: 
google book
8
Sep

आइस्पॉट का इतिहास

1. आइस्पॉट रोग कोलंबिया के CICA 6, पनामा 7 में तथा पेरू में नयलैंप में पाया देखा।

2. पहले पहल आइस्पॉट चावल की फसल पर ही देखा गया।

File Courtesy: 
http://www.apsnet.org/publications/Pla ntDisease/BackIssues/Documents/198 0Abstracts/PD_64_878.htm
8
Sep

आइस्पॉट

1. चावल के आइस्पॉट रोग को ब्राउन स्पॉट प्रकार का रोग भी कहते हैं।

2. आइस्पॉट रोग का सामान्य रोगाणु "Drechslera gigantea' है।

3. पत्तियों पर रहने वाले गीलेपन की लंबी अवधि से आइस्पॉट रोग के विकास को बढ़ावा मिलता है।

File Courtesy: 
http://www.apsnet.org/publications/Pla ntDisease/BackIssues/Documents/198 0Abstracts/PD_64_878.htm
8
Sep

डॉनी मिल्ड्यू के नियंत्रण की पारंपरिक पद्धतियां

डॉनी मिल्ड्यू के नियंत्रण की पारंपरिक पद्धतियां :

1. केवल रोग मुक्त बीजों का की चयन और इस्तेमाल करें। यदि संभव हो तो डॉनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी किस्मों का इस्तेमाल करें।

2. स्वस्थ बिचड़ों का प्रतिरोपण करें। फ़सल चक्रण को व्यवहार में लाएं। कटाई के बाद पौधे के अवशेषों की जुताई करें।

3. पौधों के बीच पर्याप्त स्थान छोड़ें, ताकि उनकी छत्ती का घनत्व कम हो और आर्द्रता में कमी आए। नई वृद्धि वाली पत्तियों की छंटाई से भी नियंत्रण में मदद मिलती है।

4. संक्रमित पौधे तथा संक्रमित प्ररोह की छंटाई कर दें। हालाकि ये कार्य तब करें जब पौधे गीले न हो।

File Courtesy: 
http://www.oisat.org/pests/diseases/fu ngal/downy_mildew.html
8
Sep

डॉनी मिल्ड्यू के प्रबंधन विकल्प

• डॉनी मिल्ड्यू रोग के नियंत्रण के विकल्पों में शामिल हैं पारंपरिक पद्धतियां तथा प्रतिरोधी किस्मों का इस्तेमाल।

8
Sep

डॉनी मिल्ड्यू के पूर्व प्रवृत्त कारक

चावल के  डॉनी मिल्ड्यू रोग को बढ़ावा देने वाले कारक निम्न हैं। 

1. ठंडा नम तथा गर्म नम जलवायु स्थितियां।

2. पौधों के बीच में पाये जाने वाले खर-पतवार। 

3. संक्रमित पत्तियां जो टूट कर खेतों में छूट जाती हैं।  

 

File Courtesy: 
http://www.oisat.org/pests/diseas es/fungal/downy_mildew.html
8
Sep

डॉनी मिल्ड्यू का सामान्य रोगाणु

• डॉनी मिल्ड्यू का सामान्य रोगाणु Sclerophthora macrospore है।

8
Sep

डॉनी मिल्ड्यू के लक्षण

डॉनी मिल्ड्यू रोग के लक्षण निम्नलिखित होते हैं:

1. डॉनी मिल्ड्यू का संक्रमण पत्ती की ऊपरी सतह पर कोणीय पीले धब्बे के रूप में आरंभ होता है। 

2. आगे चलकर वे चमकदार पीले धब्बे में बदल जाते हैं। 

3. अंततः इन धब्बों के आंतरिक हिस्से पीले किनारे के साथ भूरे रंग के हो जाते हैं। 

4. संक्रमित पत्ते के अंदर की ओर का हिस्सा ठीक और धूसर रहता है, जहां कवक का विकास होता है। संक्रमित प्ररोह, फल तथा बीजों में कवक के स्पोर की सफेद परत चढ़ी रहती है।    

5. सुबह में डॉनी कवक का विकास पत्ती के उल्टी सतह पर होता है। 

 

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