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Package of Practices

Package of Practices
1
Jul

वायु संचारित चावल की खेती

वायु संचारित चावल की खेती :-

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
1
Jul

उ.प्र एंव उत्तराखण्ड में बासमती एंव सुगन्धित धान की प्रजातियों की गुणवत्ता एंव उपज वृद्धि में सहयक प्रभावी बिन्दू:

उ.प्र एंव उत्तराखण्ड में बासमती एंव सुगन्धित धान की प्रजातियों की गुणवत्ता एंव उपज वृद्धि में सहयक प्रभावी बिन्दू:

चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, एवं सोसायटी फॉर मैनेजमेंट आफ एग्र्री-रूरल प्रोजेक्ट्‌स, कानपुर द्वारा गत 08 वर्ष से बासमती एंव सुगन्धित धान पर अध्ययत किया जा रहा है। उसके आधार पर यह निष्कर्ष निकला गया है कि धान उत्पादकों को अच्छी गुणवत्ता की उपज प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है:-

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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1
Jul

उन्नत पूसा बासमती-1(पूसा 1460)

उन्नत पूसा बासमती-1(पूसा 1460):

  • पूसा बासमती में अणुविक चिन्हव विधि द्वारा जीवाणु जनित कुलासा रोग रोधी जीन समायोजन के द्वारा तैयार की गयी इस प्रजाति का विमोचन 2007 में उन्नत पूसा बासमती-1 के नाम से किया गया।
  • यह 140 से 145 दिन में पककर तैयार होती है।
  • तथा इसकी उपज 45-50 कु/हे है
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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1
Jul

बासमती-386, पूसा बासमती-1

बासमती-386:

  • पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 160 से 170 सेमी0 औसत कद वाली यह प्रजाति लगभग 155 दिन मे पक जाती है इसके चावल लम्बे, पतले व खुशबूदार एवं उच्च गुणवत्ता वाले होते है इसकह औसत उपज 20 से 25 कु0/हे0 है।

 
 पूसा बासमती-1 :

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1
Jul

तरावड़ी बासमती

तरावड़ी बासमती :

  • आज भी राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक के रूप में प्रयोग की जाने वाली इस प्रजाति का विकास हरियाणा कृषि विश्व विद्यालय के कौल केन्द्र द्वारा वर्ष 1995 में किया गया।
  • औसतन 135-140 से0 मी0 ऊंचाई वाली यह प्रजाति लगभग 140-145 दिनों में पक जाती है।
  • इसकी औसत उपज 30-35 कुन्तल प्रति हेक्टेअर है।
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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1
Jul

टाईप-3 (देहरादून बासमती)

टाईप-3 (देहरादून बासमती) :

  • वर्ष 1935 में चयन द्वारा विकसित लम्बें, पतले एंव सुगन्धित दानों के कारण आज भी प्रदेश के विभिन्न भागों में उगाई जा रही है।
  • इसके पौधों की औसतन ऊंचाई 145-150 से0 मी0 होती है।
  • यह लगभग 140-145 दिनों में पक जाती है।
  • इसकी औसत उपज 25-30 कुन्तल प्रति हेक्टेअर है।
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
1
Jul

बासमती चावल की पारम्परिक प्रजातियां

बासमती 370 :

  • अपनें बेहतर स्वाद एवं ख्शुाबू के लिए प्रसिद्व, वर्ष 1933 में नगीना केंन्द्र द्वारा विकसित यह प्रजाति आज भी अपना एक मुकाम बनाये है।
  • पकने के बाद इसके दानों की लम्बाई में लगभग दो गुनी वृद्वि हो जाती है।
  • इसके पौधों की ऊंचाई 150 से0 मी0 होती है।
  • यह 145 से 150 दिन में पक जाती है।
  • इसकी औसत उपज 25-30 कुन्तल प्रति हेक्टेअर है।
     
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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1
Jul

सुवासी धान की प्रजातियाँ

सुवासी धान की प्रजातियाँ:

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
1
Jul

उत्तर प्रदेश में बासमती/सुगन्धित चावल उत्पादन परिदृश्य

उत्तर प्रदेश में बासमती/सुगन्धित चावल उत्पादन परिदृश्य

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C S Azad Univeristy of Agriculture and Technology, Kanpur
1
Jul

बासमती/सुगन्धित चावल परिचय

बासमती/सुगन्धित चावल परिचय

अपनी अद्भुत गुणवत्ता के लिए प्रश्सांनीय बासमती/सुगन्धित चावल भारत उपमहाद्वीप के लिए प्रकृति का एक मनोआनन्दित उपहार है। यह चावल अपने दानों की आकृति, लम्बाई, चौडाई, सुस्वाद, सुपाच्यता एंव पकने के बाद इनके दानों की लम्बाई में लगभग दो गुनी वृद्धि के कारण स्थानीय एंव अर्न्तराष्ट्रीय बाजार में उच्च मूल्य पर बेंचे जाते है। भारतीय उपमहाद्वीप में सुवासी चावल को दो समूहों में बांटा गया है।

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
1
Jul

अंतर-फसल और खाद व उर्वरक (Intercropping and Manure and fertilizers)

अंतर-फसल और खाद व उर्वरक (Intercropping and  Manure and fertilizers)

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

चावल की प्रसिद्ध नस्लें (Popular rice varieties)

चावल की प्रसिद्ध नस्लें  (Popular rice varieties)

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

चावल के बीज की दर (Seed rate of rice)

चावल के बीज की दर (Seed rate  of rice)

 

  • सीधी बुआई (डाइरेक्ट सीडिंग) @ 80 -100 कि.ग्रा./हेक्टेयर
  • रोपाई (ट्रांसप्लान्टेशन) @ 35 -40 कि.ग्रा./हेक्टेयर
  • सामान्य/ फ़ाइन/ सुपरफ़ाइन ग्रुप @10-12 कि.ग्रा./एकड़
  • बासमती ग्रुप @ 8 कि.ग्रा./एकड
     
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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

हरियाणा की मिट्टी (Soils of Haryana)

हरियाणा की मिट्टी (Soils of Haryana)

1. चिकनी मिट्टी (क्ले) व क्ले लैम;  कम नाइट्रोजन ( N); मध्यम फॉस्फोरस (P), अधिक पोटैशियम (K), कम से मध्यम जिंक

और अन्य पोषक तत्व अधिक मात्रा में लगभग सारी मिट्टी जलोढ़ (एलूवियम) के कारण बनी होती है। यह राज्य गंगा और

सिंधु नदी के निचले स्तर में बसा हुआ है।

2. यह बहुत ही विस्तृत मैदान है जो दो नदी घाटियों के बीच स्थिति जलस्तर (वाटरशेड) के समीप स्थित है। यह नम भूमि का

बहुत बड़ा मैदान है।

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

हरियाणा में चावल की खेती (Rice Cultivation in Haryana)

हरियाणा में चावल की खेती (Rice Cultivation in Haryana)

1. हरियाणा के 18 जिलों में चावल उपजाया जाता है। इनमें से 7 जिले उच्च उत्पादकता वाले समूह में आते हैं अर्थात यहां

2500 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर से अधिक उपज होती है।

2. इन सात जिलों में त्रिवर्षीय औसत क्षेत्र 5.15 लाख हेक्टेयर रहा जो कि राज्य में चावल के त्रिवर्षीय औसत क्षेत्र (10.73 लाख

हेक्टेयर) का 48% था।

3. इन सात जिलों में त्रिवर्षीय औसत पैदावार 14.19 लाख टन रही जो कि राज्य में चावल की त्रिवर्षीय औसत पैदावार (25.68

लाख टन) का 55.2% थी। 

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

अधिक उत्पादन वाली प्रजातियां (High Yielding Varieties)

अधिक उत्पादन वाली प्रजातियां (High Yielding Varieties)

1. वर्ष 2008-09 के दौरान धान की अधिक उपज वाली प्रजातियों के तहत कुल क्षेत्र 74.4 प्रतिशत था जबकि 2009-10 के

दौरान 2009-10 के दौरान धान की अधिक उपज वाली प्रजातियों के लिए कुल अनुमानित क्षेत्र 75.4 प्रतिशत था।
 

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

कृषि संबंधी पैदावार(Agricultural Production)

कृषि संबंधी पैदावार(Agricultural Production)

1.  राज्य के गठन के बाद से ही हरियाणा में अनाजों की पैदावार में अच्छी प्रगति हुई है।

2. वर्ष 2009-10 में राज्य में अनाज की कुल पैदावार 155.28 लाख टन होने की संभावना है।

3. कृषि संबंधी पैदावार को आगे बढ़ाने में गेहूं और धान की फसल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

4. 2009 में लगभग 36.25 लाख टन चावल का उत्पादन होना अनुमानित है।

चावल की औसत उपज

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

हरियाणा राज्य में चावल से जुड़े विकास कार्यक्रम (Development programs related to rice in Haryana State)

हरियाणा राज्य में चावल से जुड़े विकास कार्यक्रम (Development programs related to rice in Haryana State)

1. वर्ष 2007-08 से भारत सरकार ने दो नई केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं प्रारंभ की है जिसका नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) है।

2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) का मुख्य उद्देश्य राज्य में चिह्नित किए गए कुछ जिलों में स्थायी तौर पर क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से गेहूं और दाल की पैदावार बढ़ाना है।

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

हरियाणा राज्य में कृषि संबंधित हेल्पलाइन (Agricultural Help-Line in Haryana state)

हरियाणा राज्य में कृषि संबंधित हेल्पलाइन (Agricultural Help-Line in Haryana state)

1. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU), हिसार तथा क्षेत्रीय रिसर्च स्टेशन, उचानी (करनाल) और बावल (रेवाड़ी)  में टॉल फ़्री (बिना किसी शुल्क के) कृषि हेल्पलाइन उपलब्ध है जिसके माध्यम से किसान CCSHAU, हिसार के विशेषज्ञों से फोन पर बात कर अपनी समस्याओं के समाधान के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

2.  किसानों की समस्या के समाधान के लिए एक विशेष मोबाइल नंबर 9815862026 पर SMS करने की नई सुविधा प्रारंभ की गई है।

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
1
Jul

ज़ीरो टिलेज़ (Zero tillage)

ज़ीरो टिलेज़ (Zero tillage)

1. किसानों को ज़ीरो टिल प्रौद्योगिकी दी जा रही है। यह समय पर फसल की बुआई करने में, ऊर्जा की बचत करने में और

2000 से 2500 रु. प्रति हेक्टेयर की दर से फसल की कीमत में कम करने में बहुत उपयोगी साबित हुई है।

2. वर्ष 2008-09 के दौरान इस प्रौद्योगिकी के माध्यम से लगभग 5.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई की गई।

3.  वर्ष 2009-10 के दौरान भी पिछले वर्ष की भांति कृषि विभाग द्वारा किसानों को सब्सिडी दर पर कृषि से जुड़े विभिन्न

प्रकार के मशीन/औजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
 

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सी.सी.एस – एच.ए.यू, राईस रिसर्च स्टेशन, कौल, हिस्सार
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