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Package of Practices

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3
Jul

चावल के फाल्स स्मट का रोगजनक

उस्टिलैजिनोइडिया वाइरेन्स /Ustilaginoidea virens (Syn : Claviceps oryzae - sativa)
स्पोरबॉल के ऊपर क्लेमाइडोस्पोर का निर्माण होता है। यह गोलाकार से लेकर अंडाकार तथा मोमिया और जैतूनी होता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

False Smut of Rice चावल का फाल्स स्मट

लक्षण:

यह कवक चावल के दाने को मखमली लगने वाले हरे रंग के स्पोर बॉल के रूप में बदल देते हैं। रोगजनक के फ्रक्टिफिकेशन के विकास के कारण अंडाशय बड़े आकार के हरे रंग वाले मखमली पिंड में बदल जाते हैं। प्रायः एक बाली (पुष्पगुच्छ) में कुछ ही शूकिका प्रभावित होते हैं।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Management for Bacterial Leaf Blight (BLB) of Rice चावल के बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) रोग का प्रबंधन

- खूंटियों को जला दें।
- ऊर्वरकों का इस्तेमाल की उचित मात्रा में ही करें।
- प्रतिरोपण के समय बिड़वे के ऊपरी छोर की क्लिपिंग न करें।
- जलप्लावन की स्थिति से बचें।
- खर-पतवार रूपी परपोषियों को निकाल दें।
- प्रतिरोधी किस्में उगाएं, जैसे- बिरसामती, बिरसा विकास धान 110, बिरस विकास धान 109, हजारीधान, सदाबहार, बिरसा धान 108, शिवम और स्वर्ण। ये किस्में चावल के बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) रोग के लिए प्रतिरोधकता दर्शाते हैं।
- बीजोपचार: कार्बेंडाजिम 50 WP या बीम (ट्राइसायक्लाजोल) @ 2 ग्राम/किग्रा बीज की दर से।

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BAU, Ranchi
3
Jul

ಸಸ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದ ನಿರ್ವಹಣೆ (Nursery Management) and ಉಪ್ಪುನೀರಿನ ಬೀಜೋಪಚಾರದ ನಂತರ ಬೀಜಗಳ ಆಯ್ಕೆ (Selection of seed by salt water treatment)

ಸಸ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದ ನಿರ್ವಹಣೆ (Nursery Management)

ಎರಡುವಿಧದ ಸಸ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳು ಇವೆ

  • ಶುಷ್ಕ ಸಸ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರ
  • ನೀರಾವರಿ ಸಸ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರ

ಉಪ್ಪುನೀರಿನ ಬೀಜೋಪಚಾರದ ನಂತರ ಬೀಜಗಳ ಆಯ್ಕೆ (Selection of seed by salt water treatment)

  • ಗಟ್ಟಿ ಬೀಜಗಳನ್ನು ಮತ್ತು ಉಪ್ಪುನೀರನ್ನು 1:4 ಪ್ರಮಾಣದಲ್ಲಿ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಿ (ಉಪ್ಪು ನೀರು ಗಾತ್ರದಲ್ಲಿ).
  • ಬೀಜ ಮುಳುಗಿಸಿ. ಚೆನ್ನಾಗಿ ಕಲಕಿ, ತೇಲುವವನ್ನು ತೆಗೆಯಿರಿ. ಭಾರವಾದವನ್ನು ಸಿಹಿನೀರಲ್ಲಿ ತೊಳೆಯಿರಿ (ಪ್ರಮಾಣಿತ ಬೀಜವಾದರೆ ಉಪ್ಪುನೀರಿನ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಅನಗತ್ಯ).
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ZARS - Mandya
3
Jul

ಸಾಗುವಳಿಗೆ ಬೇಕಾದ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳು (ಪ್ರತಿ ಹೆಕ್ಟೇರಿಗೆ) - Inputs required for cultivation (per hectare)

ಸಾಗುವಳಿಗೆ ಬೇಕಾದ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳು (ಪ್ರತಿ ಹೆಕ್ಟೇರಿಗೆ) - Inputs required for cultivation (per hectare)

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ZARS-Mandya
3
Jul

Mode of Spread and Survival for Bacterial Leaf Blight (BLB) of Rice चावल के बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) रोग के फैलने के तरीके और उसकी उत्तरजीविता

इनोक्युलम के श्रोत के रूप में संक्रमित बीज महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है क्योंकि जीवाणु तेजी से कम होने लगते हैं और बीज के फूलने के दौरान मर जाते हैं। रोगजनक मिट्टी, पौधे के संक्रमित खूंटी और सहवर्ती परपोषी जैसे कि लीर्सिया एसपीपी (Leersia spp), प्लैन्टैगो नेजर (Plantago najor), पैस्पैलम डिक्टम (Paspalum dictum), तथा सियानोडोन डैक्टिलोन (Cyanodon dactylon) में जीवित रहते हैं। रोगजनक सिंचाई के जल के साथ सूखे मौसम में फैलते हैं और साथ ही इनका फैलाव टाइफून और वर्षा वाले तूफानों के जरिए भी होता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Favourable conditions for Bacterial Leaf Blight (BLB) of Rice चावल के बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) रोग के लिए अनुकूल दशाएं

प्रतिरोपण के समय बिचड़े के ऊपरी सिरे का क्लिपिंग, भारी वर्षा, भारी ओस, बाढ़, गहरा सिंचाई-जल, तेज हवा, 25-30 डिग्री का तापमान और अधिक मात्रा में नाइट्रोजन युक्त ऊर्वरक का इस्तेमाल खासकर देर से उपिवेशन के समय।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Pathogen for Bacterial Leaf Blight (BLB) of Rice चावल के बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) रोग का रोगजनक

जैन्थोमोनस ओराइजी / Xanthomonas oryzae pv. oryzae
यह जीवाणु पूरी तरह वायुजीव, ग्राम नेगेटिव, अ-वीजाणु निर्माता, छड़ की आकृति का होता है जिसका आकार 1-2 x 0.8-1.0um होता है जिसमें 6-8 um का मोनोट्रिकस पोलर फ्लैजेलियम पाया जाता है। पत्ती के संपूर्ण किनारे पर गोल आकार के उभरी हुई कॉलोनी होती हैं जो बाद में पीले रंग की और अपारदर्शी होती हैं।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Bacterial Leaf Blight (BLB) of Rice चावल का बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) रोग

लक्षण: यह रोग प्रायः हेडिंग के समय प्रकट होता है लेकिन कुछ गंभीर स्थितियों में इससे पहले भी प्रकट हो सकता है। नर्सरी में बिचड़े पर वृत्ताकार, पीले धब्बे पत्ती के किनारे के हिस्से में दिखाई पड़ते हैं जो बाद में फैलकर पत्ती के सूखने का कारण बनते हैं(चित्र 19)। प्रतिरोपण के 1-2 सप्ताह बाद “Kresek” के लक्षण बिचड़े में दिखाई पड़ते हैं। पत्ती की छोर पर लगे चीरे से होकर जीवाणु (बैक्टीरिया) अंदर प्रवेश करता है और अपनी संख्या वृद्धि द्वारा अंततः संपूर्ण बिड़वे की मृत्यु का कारण बनता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Management for Sheath Blight of Rice disease चावल के शीथ ब्लाइट रोग का प्रबंधन

- ऊर्वरकों की अधिक मात्रा के इस्तेमाल से बचें।
- पौधों के बीच यथासंभव अधिक दूरी रखें
- खर-पतवार परपोषियों को नष्ट करें।
- जैविक सुधारों को अपनाएं।
- संक्रमित खेत से सिंचाई जल का प्रवाह स्वस्थ खेतों की ओर न होने दें।
- गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करें और फसल की खूंटियों को जला दें।
- बीजोपचार: कार्बेंडाजिम 50 WP या बीम (ट्राइसायक्लोजोल) @ 2 ग्राम/किग्रा बीज की दर से।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Mode of spread and survival of Sheath Blight of Rice disease चावल के शीथ ब्लाइट रोग के फैलने के तरीके और उसकी उत्तरजीविता

स्क्लेरोशिया या मायसीलियम के रूप में रोगजनक 20 महीने तक सूखी मिट्टी में और 5-8 महीने तक गीली मिट्टी में जिन्दा रह सकता है। यह फसल के 32 कुलों की 188 से भी अधिक किस्मों को संक्रमित करता है। स्क्लेरोशिया सिंचाई के पानी के जरिए फैलता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Favourable conditions for Sheath Blight of Rice disease चावल के शीथ ब्लाइट रोग के लिए अनुकूल दशाएं

उच्च आपेक्षिक आर्द्रता (96-97%), उच्च तापमान (30-32 डिग्री से.) और नाइट्रोजन ऊर्वरकों की अत्यधिक मात्रा।

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BAU, Ranchi
3
Jul

ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಅಕ್ಕಿ ಉತ್ಪಾದನೆಯ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ (Rice Production Technologies of Karnataka)

ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಅಕ್ಕಿ ಉತ್ಪಾದನೆಯ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ (Rice Production Technologies of Karnataka)

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ZARS, Mandya
3
Jul

Pathogen for Sheath Blight of Rice disease चावल के शीथ ब्लाइट रोग के रोगजनक

1. राइजोक्टोनिया सोलानी Rhizoctonia solani (लैंगिक अवस्था : थैनिटोफोरस ककमेरिस/Thanetophorus cucumeris)
2. कवक द्वारा प्रायः पटयुक्त माइसीलियम की लंबी कोशिकाओं का निर्माण किया जाता है जो शुरुआती अवस्था में काचाभ या पारभासक होते हैं, और बाद में पीले-भूरे रंग के हो जाती हैं।

3. यह बड़ी संख्या में ग्लोबोसेस स्क्लेरोसिया का निर्माण करता है जो शुरू में सफेद पर बाद में उनका रंग भूरा या बैंगनी-भूरा हो जाता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Sheath Blight of Rice disease चावल का सीथ ब्लाइट रोग

लक्षण:
1. कवक द्वारा फसल टिलरिंग से लेकर हेडिंग अवस्था तक प्रभावित होती है। शुरुआती लक्षण पत्रावरण पर जल की सतह के निकट दिखाई पड़ता है। पत्ती के आवरण पर अंडाकार अथवा दीर्घवृत्ताकार या फिर अनियमित आकार के हरे-धूसर धब्बे बनते हैं।
2. धब्बों के बड़े होने पर उनका केन्द्र धूसर-सफेद हो जाता है जिसका किनारा अनियमित आकार में काले-भूरे या बैंगनी-भूरे रंग का होता है।
3. पौधे के ऊपरी हिस्से के क्षत तेजी से फैलता हैं और आपस में मिलकर संपूर्ण टिलर को जल रेखा से लेकर फ्लैग लीफ तक ढक लेता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Management of Brown Leaf Spot of Rice चावल के ब्राउन लीफ स्पॉट का प्रबंधन

- खेत की सफाई: खेत से सहवर्ती परपोषियों और संक्रमित कचरों को खत्म करना।
- फसल चक्रण, रोपणकाल का समायोजन और उचित खाद दिए जाने की सिफारिश की जाती है।
- धीमी गति से घुलने वाले नाइट्रोजनी ऊर्वरक के इस्तेमाल की सिफारिश की जाती है।
- रोगमुक्त बीजों का इस्तेमाल करें।
- प्रतिरोधी किस्म: रोग प्रतिरोधी किस्मों के चावल उगाएं। बिरसामती, बिरसा विकास धान 110, बिरसा विकास धान 109, हजारीधान, सदाबहार, बिरसा धान 108, शिवम, विरेन्द्र, सुगंधा और राजश्री जैसे किस्मों ने ब्राउन लीफ स्पॉट के लिए प्रतिरोध दर्शाया है।
- बीजोपचार: कार्बेंडाजिम 50 WP या बीम (ट्राइसाइक्लाजोल) @ 2 ग्राम/किग्रा बीज की दर से।

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3
Jul

Mode of Spread and Survival of Brown Leaf Spot of Rice चावल के ब्राउन लीफ स्पॉट का फैलाव और उत्तरजीविता

1. प्राथमिक संक्रमण के लिए संक्रमित बीज सबसे सामान्य श्रोत होते हैं। संक्रमित बीज में पाया जाने वाला कोनिडिया और संक्रमित ऊतक का माइसीलियम 2 से तीन सालों तक प्रभावी रह सकता है।
2. मिट्टी में कवक 30 डिग्री से. तापमान पर 28 महीने और 35 डिग्री से. पर 5 महीने तक जिंदा रह सकता है। वायु जनित कोनिडिया द्वारा पौधे नर्सरी और मुख्य खेत दोनों स्थानों पर संक्रमित हो सकते हैं।
3. कोनिडिया का अधिकतम फैलाव तब होता है जब हवा का वेग 4.0-8.8 किमी/घंटा होता है। न्यूनतम तापमान 27-28 डिग्री से., आपेक्षिक आर्द्रता 90-99% और वर्षण 0.4-14.4 मिमी कोनिडिया के अधिकतम फैलाव के लिए अनुकूल होते हैं।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Favourable Conditions for Brown Leaf Spot of Rice चावल के ब्राउन लीफ स्पॉट के लिए अनुकूल दशाएं

1. 80% से अधिक आपेक्षिक आर्द्रता के साथ 25-30 डिग्री तापमान इसके लिए बहुत ही अनुकूल होता है। नाइट्रोजन की अधिकता रोगग्रस्तता को बढ़ा देता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Pathogen for Brown Leaf Spot of Rice चावल के ब्राउन लीफ स्पॉट के रोगजनक

1. हेल्मिन्थोस्पोरियम ओराइजी (Helminthosporium oryzae) (Syn : Drechslera oryzae) (लैंगिक अवस्था : कोचिलोबोलस मियाबिनस/Cochliobolus miyabeanus).
2. एच. ओराइजी (H. oryzae) धूसर-भूरे रंग से लेकर गहरे भूरे रंग तक के सेप्टेट माइसीलियम उत्पन्न करते हैं। कोनीडियोफोर एकल अथवा छोटे समूह में प्रकट हो सकते हैं।
3. वे सीधे होते हैं, कभी-कभी जानुनत और हल्के पीले रंग से लेकर भूरे रंग तक के होते हैं। कोनिडिया प्रायः मध्य भाग में उभार के साथ वक्र होता है और सिरे की ओर क्रमशः पतला और लगभग सीधा और हल्के पीले रंग से लेकर सुनहले भूरे रंग का होता है और यह 6-14 पटयुक्त होता है।

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BAU, Ranchi
3
Jul

Brown Leaf Spot of Rice चावल का ब्राउन लीफ स्पॉट

लक्षण:
1. फसल पर कवक का आक्रमण नर्सरी में बिड़वे की अवस्था से लेकर मुख्य खेत में दाने में दूध आने की अवस्था तक होता है। मुख्य लक्षण है- कोलियोप्टाइल, पत्र फलक, पत्र आवरण और ग्लूम पर क्षत चिह्न(धब्बे) का होना। ये धब्बे पत्र फलक और ग्लूम पर प्रमुखता से होते हैं।
2. रोग पहले छोटॆ-छोटे बिदुओं के रूप में प्रकट होता है फिर बाद में ये बेलनाकार या अंडाकार से लेकर गोल आकार के हो जाते हैं। अनेक धब्बे फैलकर आपस में मिल जाते हैं और फिर पत्ती सूख जाती है।
3. बिचड़े का मृत होकर नर्सरी को प्रभावित करने का दूर से ही उनके झुलसे हुए रूप को देखने से पता चल जाता है।

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BAU, Ranchi
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