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Popular Varieties

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24
Sep

उच्च ऊंचाई के क्षेत्रों के लिए ठंड के प्रति सहिष्णु किस्में

उच्च ऊंचाई के क्षेत्रों के लिए ठंड के प्रति सहिष्णु किस्में

1. उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाया जाने वाला चावल फूल लगने और पकने के चरण में कम तापमान का सामना करता है जो पैनिकल अधूरे निकलने, अतुल्यकालिक फूल लगने और खराब बीज सेटिंग का कारण बनता है जो उपज के नुकसान के रूप में दिखाई देता है।

2. आधुनिक उच्च उपज इंडिका चावल की किस्मों ने चावल उगाने के इन पारंपरिक क्षेत्रों में तापमान के प्रति उनकी संवेदनशीलता के कारण प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं दिखाया है।

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ICAR NEH, Umiam
24
Sep

आरसी मनिफोउ 7

आरसी मनिफोउ 7

1.यह गामा किरण (30 Kr) के विकिरण के बाद पुन्शी से व्युत्पन्न एक उत्परिवर्ती कल्चर है और एनईएच क्षेत्र के लिए आईसीएआर रिसर्च परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (100 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और 30 सेमी लम्बाई के लम्बे और अच्छी तरह से बाहर निकले पैनिकल्स होते हैं। इसके दाने लम्बे व पतले (25.0 ग्राम/1000 दाने), सफेद खोल के साथ होते हैं।

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ICAR NEH, Umiam
24
Sep

आरसी मनिफोउ 5

आरसी मनिफोउ 5

1.यह कलिंग 2 व पल्मन के बीच क्रॉस से चयनित है और एनईएच क्षेत्र के आइसीएआर शोध परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (96 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और 18-20 सेमी लम्बाई के सघन, अच्छी तरह से बाहर निकले पैनिकल होते हैं। इसके दाने मध्यम (23.0 ग्राम/1000 दाने) व सफेद खोल के साथ अर्ध पारदर्शी होते हैं।

3. इसे मणिपुर निचली भूमि के मध्य-ऊंचाई के क्षेत्रों में पूर्व खरीफ (फरवरी में बोयी जानी वाली) और मुख्य खरीफ (जून में बोयी जानी वाली) के दौरान लगाने के लिए अनुशंसित किया गया है।

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ICAR NEH, Umiam
24
Sep

आरसी मनिफोउ 4

आरसी मनिफोउ 4

1.यह कलिंग 2 व पल्मन के बीच क्रॉस से चयनित है और एनईएच क्षेत्र के आइसीएआर शोध परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (88 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और 19-22 सेमी लम्बाई के सघन, अच्छी तरह से बाहर निकले पैनिकल होते हैं। इसके दाने मध्यम बारीक (22.3 ग्राम/1000 दाने) व सफेद खोल के साथ अर्ध पारदर्शी होते हैं।

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24
Sep

लुम्प्पाह १

लुम्प्पाह १

1.यह क्रॉस आइआर29 x न्गोबा से चयनित है और एनईएच क्षेत्र, उमिअम, मेघालय के आइसीएआर शोध परिसर में ब्रीड किया गया है। यह अर्द्ध बौना किस्म (80-85 सेमी) है जिसके पत्ते हरे, मध्यम पैनिकल (20.7 सेमी) होते हैं जो अच्छी तरह से बाहर निकले होते हैं।

2. इसके दाने लम्बे व मोटे (28.5 ग्राम/1000 दाने), सफेद खोल के साथ होते हैं जो केन्द्र में चॉक अपारदर्शी होते हैं। यह मेघालय के मध्य-ऊंचाई की निचली पारस्थितिकी के लिए खरीफ के दौरान जून-जुलाई में बुवाई के लिए अनुशंसित है।

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24
Sep

लुन्ग्निलाफोऊ

लुन्ग्निलाफोऊ

1.यह क्रॉस आइआर x प्रसाद की संतति है एनईएच क्षेत्र के आइसीएआर शोध परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (100 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और पत्ती के आवरण पर एंथोसायनिन के धब्बे होते हैं। इसके पैनिकल लम्बे होते हैं (26 सेमी) जो अच्छी तरह से बाहर निकले, विपुल मात्रा में, गुच्छों में होते हैं।

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24
Sep

शाहसारंग 1

शाहसारंग 1

1.यह क्रॉस मिरिक्राक x रसि से चयनित है और एनईएच हाइ 2 क्षेत्र, आरापानी, मेघालय के आइसीएआर शोध परिसर में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (90-95 सेमी) है जिसके पत्ते हरे, मध्यम पैनिकल (20.6 सेमी) होते हैं जो अच्छी तरह से बाहर निकले होते हैं। इसके दाने छोटे व मोटे (27.6 ग्राम/1000 दाने), लाल खोल के साथ होते हैं जो मिलिंग के बाद सफेद हो जाते हैं।

3. दाने केन्द्र में चॉक अपारदर्शी होते हैं। यह मेघालय के मध्य-ऊंचाई की निचली पारस्थितिकी के लिए खरीफ के दौरान जून-जुलाई में बुवाई के लिए अनुशंसित है।

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24
Sep

न्गोबा

न्गोबा

1.यह लैंडरेस से चयनित है। यह एक गैर सुगंधित, चिपचिपी, बौनी (90-100 सेमी) किस्म है जिसके पौधे के भागे हरे व पैनिकल बाहर निकले हुए होते हैं।

2. इसके मध्यम दाने (26.3 ग्राम/1000 दाने), लाल खोल के साथ होते हैं जो मिलिंग के बाद सफेद हो जाते हैं। यह मेघालय के उथले भूमि के वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है। 3. यह 150-160 दिन में परिपक्व हो जाता है और

3.5-4.0 टन/हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर के प्रति मामूली प्रतिरोधी है। यह ब्लास्ट के प्रति मामूली संवेदनशील है।

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24
Sep

आरसी मनिफोउ 6

आरसी मनिफोउ 6

1.यह क्रॉस सीएच 988 x आइआर 24 से चयनित है। यह ऊंची किस्म (120-130 सेमी) है जिसके पौधे के भाग हरे होते हैं, लेकिन पत्ती के आवरण पर एंथोसाइनिन के धब्बे होते हैं। पैनिकल लम्बे (25 सेमी) होते हैं जो अच्छी तरह से बाहर निकले होते हैं।

2. इसके दाने लम्बे व मोटे (28.5ग्राम/1000 दाने), सफेद रंग की खोल के होते हैं। यह पूर्व खरीफ में 130-135 दिन में तथा मुख्य खरीफ में 115-130 दिन में परिपक्व हो जाता है और पैदावार 4.0-4.5 टन/हेक्टेयर होती है।

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24
Sep

भल्लुम 2

भल्लुम 2

1. यह क्रॉस पीएसएन 6131 के अंथर कल्चर के ज़रिए विकसित दोहर हेप्लॉइड्स से चयनित है। जारीकरण से पूर्व इसका नाम है आरसीपीएल1-27। यह गैर सुगंधित, अर्द्ध बौना किस्म (100-110 सेमी) है जिसके पौधे के भाग हरे, मध्यम पैनिकल (21-24 सेमी) होते हैं जो अच्छी तरह से बाहर निकले होते हैं।

2. इसके दाने लम्बे व मोटे (30ग्राम/1000 दाने), केंद्र पर अपारदर्शी चाक के साथ सफेद रंग की खोल के होते हैं। यह 105-115 दिन में परिपक्व हो जाता है और पैदावार 3.5-3.8 टन/हेक्टेयर होती है। यह स्टेम बोरर व गॉल मिज के प्रति मामूली प्रतिरोधी है।

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24
Sep

भल्लुम 1

भल्लुम 1

1.यह क्रॉस पीएसएन 6131 के अंथर कल्चर के ज़रिए विकसित दोहर हेप्लॉइड्स से चयनित है। जारीकरण से पूर्व इसका नाम है आरसीपीएल1-29।

2. यह गैर सुगंधित, अर्द्ध बौना किस्म (105-115 सेमी) है जिसके पत्ते हरे, मध्यम पैनिकल (22-25 सेमी) होते हैं जो अच्छी तरह से बाहर निकले होते हैं।

3. इसके दाने लम्बे व मोटे (29ग्राम/1000 दाने), केंद्र पर अपारदर्शी चाक के साथ सफेद रंग की खोल के होते हैं। यह 119-125 दिन में परिपक्व हो जाता है और पैदावार 3.5-3.8 टन/हेक्टेयर होती है।

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24
Sep

मध्यम स्तर पर ऊंची ज़मीन के चावल की किस्में

मध्यम स्तर पर ऊंची ज़मीन के चावल की किस्में

ऊंची भूमि के पारिस्थितिकी तंत्र में एक बड़ी संख्या में स्थानीय कल्टिवर्स लगाये जाते हैं और इसका एक प्रमुख हिस्सा झूम खेती के अंतर्गत है। स्थानीय जीनोटाइप ‘बाली', 'बालुंग’, ‘चनपड्डी, और ‘टेके’ एक बहुपंक्ति में संयुक्त किये गये और झूम परिस्थिति के अंतर्गत खेती के लिए अनुशंसित किये गये। मध्य ऊंचाई की ऊंची भूमि के लिये चावल की अनुशंसित किस्में हैं

1. भल्लुम 1

2. भल्लुम 2

3. आरसी मनिफोउ 6

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24
Sep

विलम्बित रोपाई के लिए प्रकाश अवधि के प्रति संवेदनशील किस्में

विलम्बित रोपाई के लिए प्रकाश अवधि के प्रति संवेदनशील किस्में

1. सलि चावल का अधिकांश भाग वर्षाजल पोषित स्थितियों के तहत उगाया जाता है। इसलिए, सलि चावल के सभी कृषि कार्य मानसून के आगमन के समय पर निर्भर करते हैं।

2. सलि चावल के रोपण में आमतौर पर अनुमान के विपरीत अधिक बारिश या नमी तनाव के कारण देरी हो जाती है। ऐसे क्षेत्र चावल के कुल क्षेत्र के 50% से अधिक पर कब्जा रखते हैं।

3. इन जोखिम कारकों के कारण, आधुनिक उच्च उपज किस्मों को अपनाना सीमित बन गया है और इन क्षेत्रों के किसान प्रकाश अवधि के प्रति संवेदनशील स्वदेशी किस्में लगाते हैं जो कम उपज देती हैं।

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24
Sep

डूब के प्रति सहिष्णु किस्में

डूब के प्रति सहिष्णु किस्में

1. आमतौर पर बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में बाढ़ की पानी 1-15 दिनों तक चावल की फसल को डूब में रखता है। इसलिए डूब के प्रति सहिष्णुता की किस्मों को विकसित करने के लिए 15-20 दिनों का ब्रीडिंग कार्यक्रम चलाया गया था।

2. तीन पंक्तियां अर्थात टीटीबी 202-3 (प्रस्तावित जलश्री), टीटीबी 202-4 (प्रस्तावित जलकुंवरी) और टीटीबी 202-25 (प्रस्तावित प्लाबन) उपयुक्त के रूप में पहचानी गई हैं।

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24
Sep

बाढ से बचने वाली किस्में

बाढ से बचने वाली किस्में

1. लुइत और कपिली जैसी छोटी अवधि की किस्में तथा हाल ही में कोलोंग, दिसांग व दिखोव जैसी किस्में विकसित की गई हैं जो बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में बाढ़ की घटना से पहले (पूर्व बाढ़) और साथ ही बाढ़ का पानी उतरने (बाढ़ के बाद) उगाई जा सकती हैं।

2. पूर्व बाढ़ के रूप में उन्हें मध्य फरवरी में बोया जाता है और मध्य मई में काटा जाता है।

3. यही किस्में बाढ़ के बाद की फसल के रूप में सितंबर के पहले सप्ताह जितनी देरी से रोपकर नवंबर में काटने के लिए लगायी जा सकती है।

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24
Sep

बसुन्धरा

बसुन्धरा

1.यह आइईटी 9711 तथा आइईटी 11161 के बीच क्रॉस से चयनित है तथा आरएआरएस, टिटाबार में विकसित की गयी है। यह मध्यम टिलरिंग क्षमता (9-11) के साथ अर्द्ध बौना किस्म (107 सेमी) है।

2. 24 ग्राम प्रति 1000 दाने वज़न के साथ इसके दाने मध्यम मोटे होते हैं। खोल सफेद, अर्ध-पारदर्शी होते हैं और बीच में सफेद निशान नहीं होता है।

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24
Sep

सत्यरंजन

सत्यरंजन

1.यह आइईटी 9711 तथा आइईटी 11162 के बीच क्रॉस से चयनित है तथा आरएआरएस, टिटाबार में विकसित की गयी है। यह मध्यम टिलरिंग क्षमता (10-13) के साथ अर्द्ध बौना किस्म (113 सेमी) है।

2. इसके दाने मध्यम मोटे, खोल सफेद अर्ध-पारदर्शी, गैर-चिपचिपे एंडोस्पर्म बीच में सफेद निशान रहित, गैर सुगंधित होते हैं।

3. यह उन क्षेत्रों में उपयुक्त है जहां सलि चावल की फसल के बाद रबी की फसल लगायी जाती है अर्थात असम के ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी के नदी वाले क्षेत्र, मध्य ब्रह्मपुत्र घाटी, उत्तरी बराक तल तथा ब्रह्मपुत्र घाटी के निचले क्षेत्र।

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24
Sep

दोहरी फसल के क्षेत्रों के लिए सलि (पतझड का चावल) की किस्में

दोहरी फसल के क्षेत्रों के लिए सलि (पतझड का चावल) की किस्में

1.असम के किसान सलि के मौसम में आम तौर पर लंबी अवधि की किस्में लगाते हैं। इसलिए सलि की खेती के अधिकांश क्षेत्र फसल की कटाई के बाद ऊसर रहते हैं।

2. हालांकि राज्य में सलि उगाने के अधिकांश क्षेत्रों (जैसे सोनितपुर, नगांव, दारांग जिलों, नदी के इलाकों) में हल्के रंग की मिट्टी है जहां रबी की फसलें चावल की मुख्य फसल के बाद लगायी जा सकती हैं।

3. ऐसे क्षेत्रों के लिए 130 दिनों की फसल अवधि की मध्यम अवधि की दो किस्में अर्थात सत्यरंजन व बसुन्धरा विकसित की गयी हैं। वे किस्में हैं:

1. सत्यरन्जन

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24
Sep

कुशल

कुशल

1.यह एक अर्द्ध-ऊंचाई (110-115 सेमी) की मध्यम टिलरिंग क्षमता (10-12 टिलर) की किस्म है। इसके दाने मध्यम मोटाई के (23.1 ग्राम/1000 दाने), अर्ध-पारदर्शी खोल के साथ बीच में सफेद निशान लिए होते हैं।

2. यह गैर-सुगंधित और गैर-चिपचिपी किस्म है। इसे असम में सलि के मौसम में उथली डूब (पानी की 0-30 सेमी पानी गहराई) के क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किया गया है।

3. यह प्रकाशकाल के प्रति असंवेदनशील है और इसे परिपक्व होने में 150-155 दिन लगते हैं तथा 5-5.5 टन/ हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर तथा गॉल मिज के प्रति अतिसंवेदनशील है।

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24
Sep

पिओली

पिओली

1.यह एक अर्द्ध-ऊंचाई (105-110 सेमी) की मध्यम टिलरिंग क्षमता (10-12 टिलर) की किस्म है। इसके दाने मध्यम मोटाई के (17.88 ग्राम/1000 दाने), अर्ध-पारदर्शी खोल के साथ बीच में सफेद निशान लिए होते हैं।

2. यह गैर-सुगंधित और गैर-चिपचिपी किस्म है। इसे असम में सलि के मौसम में उथली डूब (पानी की 0-30 सेमी पानी गहराई) के क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किया गया है।

3. यह प्रकाशकाल के प्रति असंवेदनशील है और इसे परिपक्व होने में 150-155 दिन लगते हैं तथा 5-5.5 टन/ हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर तथा गॉल मिज के प्रति अतिसंवेदनशील है।

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