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Popular Varieties

Popular Varieties
14
Oct

पंत शंकर धान 1

पंत शंकर धान 1

प्रकार का नाम: पंत शंकर धान 1

1. वंश: यूपीआरओ95-17ए × यूपीआरआइ92-133आर

2. अधिसूचना का वर्ष: 425ई/1999

3. अवधि दिनों में: 115 दिन

4. पर्यावरण प्रणाली: आइआरएम

5. (संगठन) द्वारा जारी किया गया: एसवीआरसी

6. मुख्य विशेषताएँ: 60-70 क्विंटल/हेक्टेयर डॅबल क्रापिंग, धान गेहूं / आलू / लाही / मटर अर्द्ध आधार बैंगनी फसल के लिए उपयुक्त।

7. खेती के लिए सिफ़ारिश की गई: उत्तराखंड के समतल क्षेत्र।

File Courtesy: 
G.B.Pant University of Agriculture & Technology. Pantnagar.
14
Oct

गोविंद

गोविंद

I. प्रकार का नाम: गोविंद

1. वंश: आर20 × आइआर24

2. अधिसूचना का वर्ष:-

3. अवधि दिनों में: 105-110 दिन

4. पर्यावरण प्रणाली: वर्षा पूरित

5. (संगठन) द्वारा जारी किया गया: 1982 एसवीआरसी 1989 सीवीआरसी

6. मुख्य विशेषताएँ: बौनी उपज 30-40 क्विंटल/हेक्टेयर, असंवेदनशील में चित्र, पकने की अच्छी गुणवत्ता।

7. खेती के लिए सिफ़ारिश की गई: समतल एवं पहाड़ी क्षेत्र में 3000 फीट तक उत्तराखंड में बुवाई एवं रोपना।

File Courtesy: 
G.B.Pant University of Agriculture & Technology. Pantnagar.
11
Oct

प्रजाति का नाम : श्यामला (आइईटी 12561, आर 259- डबल्यूआर 37-2)

1. उत्पत्ति - आर 60-2713 × आर 238-6  

2. परिपक्वता – 130-135 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - इस प्रजाति ने, अन्य बैंगनी पत्ती की  प्रजातियों (क्रॉस 51 एवं नागकेसर) की तुलना में, प्रमुख कीट एवं रोगों के लिए उच्च प्रतिक्रिया से बेहतर दिखाई है।

5. अजैविक तनाव - अन्य बैंगनी पत्ती की किस्मों की तुलना में सूखा के प्रति बेहतर सहनशीलता।

11
Oct

प्रजाति का नाम : सामलेश्वरी (आर 1027-2282-2-1, आइईटी 17455 आइसी 549668)

1. उत्पत्ति - आर 310-37 × आर 308-6                               

2. परिपक्वता - 120-125 दिन

3. अनाज का प्रजाति - मध्यम महीन अनाज

4. जैविक तनाव - आर से जीएम 1 एवं 4, सामान्य रूप से ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी एवं ब्राउन स्पॉट एवं नैक  ब्लास्ट के प्रति सहनशील। 

11
Oct

जाति का नाम : पूर्णिमा (आर 281-31-1, आइईटी 12284)

1. उत्पत्ति - पूर्वा × आइआर 8608-298                           

2. परिपक्वता - 100-105 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन 

4. जैविक तनाव - प्रारंभिक प्रजाति होने के कारण, यह क्षेत्र स्थिति के अधिकतम रोगों एवं कीटों से बच जाता है।

11
Oct

प्रजाति का नाम : महामाया (आर 320-298, आइईटी 10749)

1. उत्पत्ति - आशा × क्रांति                                        

2. परिपक्वता – 125-128 दिन 

3. अनाज का प्रजाति- लंबा खड़ा अनाज

4. जैविक तनाव - गॉल मिज के लिए प्रतिरोधी एवं डब्यूपीएचबीपीएच, लीफ़ फ़ोल्डर, शीथ रॉट, ब्राउन स्पॉट एवं बीएलबी के प्रति सहनशील।

11
Oct

प्रजाति का नाम : इन्दिरा बारानी धान-1 (आरएफ़-17-38-70, आइईटी 21205)

1. उत्पत्ति - स्वर्ण × आईआर 42253                                         

2. परिपक्वता – 111-115 दिन

3. अनाज का प्रजाति - मध्यम महीन अनाज

4. जैविक तनाव – स्टेम बोरर के लिए मध्यम प्रतिरोधी।

नैक  ब्लास्ट एवं बॅक्टेरियल ब्लाइट के प्रति सहनशील। 

11
Oct

प्रजाति का नाम : दुर्गेश्वरी (आर 1243-1224-578-1, आइईटी 19795)

1. उत्पत्ति - महामाया × एनएसएन 5 (एमटीसी - 4, आइईटी 11904)

2. परिपक्वता – 130-135 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा पतला अनाज

4. जैविक तनाव – 1. लीफ़ ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी।

2.   शीथ ब्लाइट, बॅक्टेरियल ब्लाइट, शीथ रॉट, गॉल मिज एवं राइस टुन्ग्रो के लिए मध्यम प्रतिरोधी/सहनशील।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान - इस प्रजाति की शारीरिक स्तर पर, सूखे के प्रति बेहतर सहनशीलता है।

11
Oct

प्रजाति का नाम : दंतेश्वरी (आइईटी 15450, आर302-111)

1. उत्पत्ति- समृद्धि × आइआर 8608-298                   

2. परिपक्वता – 100-105 दिन

3. अनाज का प्रजाति- लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - i) गॉल मिज के लिए प्रतिरोधी एवं ब्राउन स्पॉट के लिए सहनशील।

ii) यह आरम्भ काल में होने के कारण खरीफ़ मौसम के अधिकतम कीट एवं रोगों से बच जाता है।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान -i) प्रारंभिक प्रजाति होने के कारण आम तौर पर सूखे के तनाव से बच जाता है।

11
Oct

प्रजाति का नाम : बामलेश्वरी (आइईटी 14444, आर 738-1-64-2-2)

1. उत्पत्ति- आरपी 2154-40-1 × आइआर 9828-23            

2. परिपक्वता – 130-135 दिन 

3. अनाज का प्रजाति - लंबा खड़ा अनाज

4. जैविक तनाव - बामलेश्वरी प्रजाति  बीएलबी के लिए प्रतिरोधी है एवं शीथ ब्लाईट एवं ब्राउन स्पॉट के लिए सहनशील है। यह प्रजाति  गॉल मिज एवं डब्यूपीएचबीपीएच के प्रति क्षेत्र सहनशीलता रखती है।

File Courtesy: 
आइजीकेवी, रायपुर
11
Oct

प्रजाति का नाम : "चन्द्रहासिनी " (आइईटी 16800, आर 979-1528-2-1, आइसी 549667)

1. उत्पत्ति - अभय × फाल्गुन                                            

2. परिपक्वता – 120-125 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - आर से जीएम 1, बीपीएच, लीफ़ फ़ोल्डर, डब्यू, वाबीपीएच एवं नैक ब्लास्ट का सामान्य रूप से प्रतिरोधी, एवं लीफ़ ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट एवं शीथ रूट के प्रति सहनशील।

File Courtesy: 
आइजीकेवी, रायपुर
Image Courtesy: 
आइजीकेवी, रायपुर
7
Oct

सत्यरंजन

1. यह  IET 9711 तथा IET 11162 के बीच का चयन है तथा इसे RARS , टिटाबर द्वारा विकसित किया गया है। यह सेमी ड्वार्फ (113 cm) प्रजाति है, जिसकी टिलरिंग क्षमता मध्यम (10-13) होती है।   

2. इसके दाने मध्यम बोल्ड होते हैं, कार्नेल सफेद तथा पारभासी, नन-ग्लुटिनस एंडोस्पर्म, असुगंधित।  

3. यह उन इलाकों के लिए उपयुक्त होता है, जहां सली चावल के बाद रबी फ़सलें लगाई जाती हैं, जैसे कि असम का अपर ब्रह्मपुत्र वैली, सेंट्रल ब्रह्मपुत्र वैली, नॉर्थ बरक प्लेन तथा निम्न ब्रह्मपुत्र वैली जोन। 

7
Oct

लैचिट

1. यह  CRM 13-3241 तथा कलिंगा 2 के बीच का चयन है, जिसे रिजनल ऐग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन, AAU, टिटाबर में विकसित किया गया है। यह सेमी ड्वार्फ (95 सेमी) की प्रजाति है, जिसकी मॉडरेट टिलरिंग (8-11EBT/प्लांट) होती है।   

2. इसके दाने मध्यम बोल्ड (22.3g/1000grain)  होते हैं, जो सफेद तथा नन ग्लुटिनस कर्नेल वाले होते हैं। इसकी परिपक्वता में 120 दिन लगते हैं तथा उपज 4.0 t/ha होती है।   

3. यह स्टेम बोरर, लीफ ब्लाइट तथा सूखे और जलमग्नता के प्रति संवेदनशील होती है। इसे  CVRC द्वारा वर्ष 1992 में जारी किया गया है।  

 

7
Oct

वसुंधरा

1. यह  IET 9711 तथा IET 11161 के बीच का चयन है तथा इसे  RARS, AAU, टिटाबर में विकसित किया है। यह सेमी ड्वार्फ (107 सेमी) प्रजाति है, जिसमें मध्यम टिलरिंग (9-11) की क्षमता होती है। 

2. इसके दाने मध्यम आकार के (24g/1000 दाना) होते हैं। इसके कार्नेल सफेद, पारभासी होते है तथा उनमें ऐब्डोमिनल सफेद ट्रेस नहीं होते।   

7
Oct

चोकोवा या नर्म चावल

1. यह चावल का एक अन्य वर्ग है, जिसे कम समय में पकाया जा सकता है। इस प्रकार का चावल दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाया जाता है। इसका इस्तेमाल असम के त्योहारों तथा दावतों में खूब धड़ल्ले से किया जाता है।  

2.  कोमल चावल को उबालकर फिर भूरी छुड़ाकर उसे दाने के रूप में लाया जाता है, जो असम के ग्रामीण इलाकों में काफी लोकप्रिय है।  

3. इस खाद्य आयटन को लंबे समय तक के लिए संरक्षित किया जा सकता है तथा इसे ठंडे या गर्म पानी में थोड़ी देर रखने के बाद शक्कर या गुड़, दूध अथवा दही, या नमक, तेल और अचार के साथ खाया जा सकता है। 

7
Oct

बोरा या मोमी चावल

1. मोमी चावल या ग्लुटिनस चावल को देहातों में बोरा के नाम से जाना जाता है, जिसे इस राज्य के किसान अपने घरेलू ख़पत की पूर्ति के लिए उपजाते हैं। 

2. इस चावल का इस्तेमाल कई त्योहारों, धार्मिक अवसरों तथा समारोहों पर किया जाता है। इस क्षेत्र के कई समुदाय बोरा चावल से उच्च प्रकार के बीयर का निर्माण करते हैं। 

3. क्षेत्र में ग्लुटिनस चावल में भी काफी विविधताएं हैं। ग्लुटिनस चावल के दाने अपारदर्शी तथा एक स्टार्च एमाइलोपेक्टिन के मौजूद होने से यह पकने पर चिपचिपा होता है।  

7
Oct

जोहा ( सुगंधित चावल)

1. इस राज्य में जोहा चावल बासमती से अलग छोटी से मध्यम पतली/बोल्ड दाने वाली प्रजाती होती है।  

2. यह देसी कल्टिवर्स अचिपचिपी तथा सफेद स्वादिष्ट दावे वाली प्रजाति होती है, पकने के बाद जिसके दाने अलग-अलग रहते हैं। जोहा राइस के लंबे होने का अनुपात 1.4 हालांकि इस प्रजाति के चावल की खुशबू काफी ऊंची होती है। इस चावल की कीमत अन्य घरेलू बाजार वाले चावल की अपेक्षा काफी अधिक होती है। 

3. जोहा चावल का इस्तेमाल खीर (पायस), पुलाव तथा अन्य शाकाहारी तथा मांसाहारी खाद्य वस्तु के निर्माण में होता है। इसी तरह की सुगंधित प्रजाति कई दक्षिण भारतीय देशों में उगाई जाती है। 

7
Oct

बहादुर

1. यह एक सेमी-टॉल (110-115 cm) प्रजाति है, जो छिछले जल की जलमग्नता के लिए उपयुक्त होती है तथा मध्यम टिलरिंग क्षमता (10-12) वाली होती है। 

2. इसके दाने मध्यम पतले (27.74g/1000 दाना) होते हैं, जो ऐब्डोमिनल सफेद ट्रेस वाले सफेद पारभासी कर्नेल युक्त होते हैं। यह सुगंधहीन तथा नन ग्लुटिनस प्रजाति होती है। 

3. इसे असम के सली मौसम में छिछली जलमग्नता (0-30 cm जल गहराई) वाले इलाकों में उगाना चाहिए। इसकी फोटो पीरियड असंवेदनशील होती है तथा परिपक्व होने में 150-155 दिन लगते हैं। इसकी उपज 5-5.5 t/ha होती है।   

7
Oct

रणजीत

1. यह सेमी टॉल (105-110 cm) प्रजाती है, जिसमें मॉडरेट टिलरिंग क्षमता होती है (10-12 टिलर्स)। 

2.  इसके दाने मध्यम पतले (27.54g/1000 grain)  होते हैं, जो ऐब्डोमिनल सफेद ट्रेस के साथ पारभासी कर्नेल वाले होते हैं।   

3. यह सुगंधहीन तथा नन-ग्लुटिनस प्रजाति होती है। इसे असम में सली मौसम में छिछ्ली जममग्नता (0-30 सेमी गहरानी वाले जल में) वाले क्षेत्र में उगाना चाहिए। 

7
Oct

लुइट

 

1. यह  रिजनल ऐग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन,  AAU, टिटाबर में  हीरा तथा आनंदा  के बीच क्रॉस का चयन है।   

2. यह निम्न टिलरिंग वाली (6-7 EBT/plant). ) सेमी ड्वार्फ (91 cm)  प्रजाति है। इसके दाने मध्यम बोल्ड (24.8g/1000दाने) होते हैं, जो सफेद-नन-ग्लुटिनस कर्नेल तथा पारभासी एंडोस्पर्म वाले होते हैं।  

3. इसकी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए के लिए बाढ़ पूर्व तथा बाढ़ पश्चात फ़सल के रूप में अनुशंसा की जाती है तथा इसे आहू तथा साली दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है।  

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