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Crop Protection with vernacular Names

Crop Protection with vernacular Names
10
Oct

Pest out breaks in Manipur and Meghalaya मणिपुर और मेघालय में कीटों का प्रकोप

1. राइस ईयर-कटिंग कैटरपिलर को असम और मणिपुर(Pathak et aI., 2001), अरुणाचल, मेघालय और त्रिपुरा में 1982 में पाया गया था(Barwal, 1983)।

2. 1977 में काले रोएं वाले कैटरपिलर का प्रकोप मेघालय में देखा गया था( Sachan और Gangwar, 1979)। राइस हिस्पा का प्रकोप मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 1987 में देखा गया (Pathak, 1987)। 

3. 1986 से 1990  के बीच शील्ड बग की दो प्रजातियों (Eusarocoris gultieger Jhunl. and Nezara viridula L.) ने मणिपुर मे चावल की फसल को दाने में तरल दूध और दूध के ठोस होने की अवस्था में प्रभावित किया (pathak et aI., 2001)।

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Rice slug caterpillar राइस स्लग कैटरपिलर

1. स्लग कैटरपिलर (Parasa lepida) चावल की फसल में कभी-कभी लगने वाला कीट है। लार्वा पत्तों को खाता है और केवल पत्ते के मध्य सिरा ही शेष बच पाता है।

2. इसे पहली बार उत्तर-पूर्व के राज्यों में बरसात के दिनों में धान की फसल को आक्रांत करते देखा गया था (Shylesha et al., 2006)।

3. आर्थिक रूप से कम नुकसान पहुंचाने वाले अन्य कीट हैं- फ्ली बीटल ( Chaetocnema basalis and Monolepta signata ), स्टेमफ्लाई, मोल और खेत के झींगुर, ब्लैक बग, स्टिंक बग, ब्लू बीटल और काले ऐफिड।

 

 

 

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Rice Skipper राइस स्किपर

1. स्किपर (Pelopidas mathias) के कैटरपिलर पीलापन लिए हुए हरे

रंग के होते हैं और उनके पृष्ठ पर चार सफेद धारियां होती हैं 

2. इसका सिर बड़ा होता है और शरीर शुण्डाकार होता है। कैटरपिलर द्वारा पौधे को पत्रविहीन कर दिया जाता है। 

3. वयस्क तेज गति करने वाला स्किपर होता है।

 

 

 

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ICAR NEH,उमियम
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http://www.indianaturewatch.net/displayimage.php?id=147697
10
Oct

Rice Horned caterpillar राइस हॉर्न कैटरपिलर

1. राइस हॉर्न कैटरपिलर (Melanitis leda ismene) चावल की फसल का एक कम गंभीर कीट है। 

2. मादा वयस्क गहरे भूरे रंग की तितली होती है जो धान के पत्तियों पर सफेद रंग के अंडे देती हैं।

3. कैटरपिलर का रंग हरा होता है। यह रात के समय पत्तियां खाता है और दिन के समय निष्क्रिय पड़ा रहता है।

4. प्यूपा की अवस्था पत्तियों पर ही संपन्न होती है। निम्नभूमि चावल की फसल में इस कीट द्वारा फसल को उसकी वानस्पतिक वृद्धि की अवस्था में क्षति पहुंचाई जाती है।

 

 

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Root aphids रूट ऐफिड

1. रूट ऐफिड (Rhopalosiphum rufiabdommalls and tetraneura  

nigriabdominalis) को पहली बार भारत में पहचाना गया था जिससे चावल की फसल को इस संपूर्ण क्षेत्र की उच्च्भूमि अवस्था में भारी क्षति होती है (Sbylesha et a/. , 2006)। 

2. रूट ऐफिड की दो प्रजातियां काले रूट ऐफिड (Rhopalosiphum rufiabdominalis) और भूरे रूट ऐफिड (Tetraneura nigriabdominalis) उच्चभूमि चावल के पौधे की जड़ों को क्षति पहुंचाती हैं। 

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ICAR NEH,उमियम
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CRRI
10
Oct

Gundhi bug गन्धी बग

1. गन्धी बग (Leptocorisa oratorious) उच्च भूमि और निम्न भूमि

की चावल की फसल को आक्रांत करने वाला सबसे गंभीर किस्म का कीट है।  

2. निम्फ और वयस्क, दोनों, विकसित हो रहे दानों का रस पी जाते हैं जिस कारण फसल में खोखले दाने की समस्या होती है।  

3. वयस्क की तुलना में निम्फ अधिक हानिकारक होते हैं। ये कीट फसल को 20-40% तक नुकसान पहुंचाते हैं।

 

 

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ICAR NEH,उमियम
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CRRI
10
Oct

Rice green semilooper राइस ग्रीन सेमीलूपर

1. राइस ग्रीन सेमीलूपर (Naranga aenescens) चावल की फसल

को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कीट है। 

2. यह 30-40 दिन के हो चुकी उच्चभूमि चावल की फसल पर हमला करता है और 65 दिनों तक इसे आक्रांत करना जारी रखता है। लार्वा मुख्य रूप से पत्तों को खाता है और उसे नष्ट कर देता है। 

3. खेत की अवस्था में  Apanteles sp. द्वारा ग्रीन सेमीलूपर को 80% तक परजीवीकृत किया जाता है।

 

 

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ICAR NEH,उमियम
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10
Oct

Rice ear cutting caterpillar राइस ईयर कटिंग कैटरपिलर

1. राइस ईयर कटिंग कैटरपिलर (Mythimna separata) का 1982 में असम में भारी प्रकोप हुआ था और फिर यह मणिपुर, अरुणाचलप्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में फैला।

2. इस क्षेत्र में यह चावल के फसल में लगने वाला एक महत्वपूर्ण कीट है। इसके प्रकोप से खड़ी फसल शत-प्रतिशत नष्ट हो सकती है। 

3. लार्वा धान की बाली के शीर्ष को काट कर उसे पौधे के तने के पीछे डाल देता है जो देखने में ऐसा लगता है मानो किसी जानवर द्वारा चर लिया गया हो। यह सीधे फसल की उपज को प्रभावित करता है।

 

 

 

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Rice Hispa राइस हिस्पा

1. राइस हिस्पा (Dicladispa armigera) एक नीले-काले रंग का बीटल है

जो स्पाइन से ढका होता है। लार्वा द्वारा पत्तों में लंबे सुरंग बनाए जाते हैं जबकि वयस्क पत्तियों से क्लोरोफिल खुरच कर हटा दिया जाता है।   

2. प्रभावित पत्तियां सफेद जालीदार हो जाती हैं और आखिरकार सूख जाती हैं। पत्र फलक की ऊपरी सतह के खुरच जाने से निचला एपिडर्मिस सफेद लकीर की तरह हो जाता है और यह मध्यशिरा के समांतर होता है। 

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10
Oct

Rice gall midge राइस गॉलमिज़

1. गॉल मिज़ (Orseolia oryzae) मणिपुर में धान की फसल में

लगने वाला एक बहुत ही हानिकर कीट है और यह संपूर्ण क्षेत्र में एक सामान्य कीट के रूप में पाया जाता है। 

2. चावल की फसल में कल्ले फूटने के समय इसका प्रकोप उच्च और निम्न दोनों प्रकार की भूमियों में होता है। असम के गहरे पानी वाले क्षेत्रों में भी इसके पाए जाने की पुष्टि हुई है।

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CRRI
10
Oct

Rice Thrips राइस थ्राइप्स

1. थ्राइप्स के निम्फ (शिशुकीट) और वयस्क दोनों ही कोमल पत्तियों

के रस पीकर जीते हैं।

2. प्रभावित पौधे के पत्तों के अग्र भाग मुर्झाने लगता है और मुड़ जाता है। पत्तों के इन्हीं मोड़ों में थ्राइप्स रहते हैं।

3. सिक्किम में और त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर एवं अरुणाचल प्रदेश के झूम क्षेत्रों में पाए जाने वाला  यह एक गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला कीट है।  

 

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10
Oct

Rice Armyworm राइस आर्मीवर्म

1. आर्मी वर्म (Spodoptera mauritia) मेघालय के जोवई जिले के उमरैयांग घाटी, मणिपुर और त्रिपुरा राज्यों घाटी क्षेत्र में चावल की फसल में तेजी से फैलने वाला कीट है।

2. कैटरपिलर पत्ते खाकर जीते हैं और फसल पर इनके गंभीर प्रकोप होने की स्थिति में बिचड़े और मुख्य फसल वाले संपूर्ण खेत नष्ट होकर इस तरह दिखते हैं मानो वे जानवरों के द्वारा चर लिए गए हों।    

3. रात के समय लार्वा बड़ी तेजी से पत्तों को खाते हैं और दिन के समय मिट्टी के छिद्रों और दरारों में छिप जाते हैं। 

 

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Rice Caseworm राइस केसवर्म

1. केस वर्म (Nymphula depunctalis) उत्तर पूर्व के बहुत से इलाकों में

पाया जाने वाला गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाला कीट है।

2. वयस्क केस वर्म 6 मिमी लंबे होते हैं और इनके डैनों का फैलाव 15 मिमी होता है। हरे रंग के पतले कैटरपिलर 1.25 सेमी लंबे पत्ते के टुकड़े काटते हैं और इनसे नलिकाकार सरंचनाओं का निर्माण करते हैं जिन्हें खाकर वे एक से दूसरे पौधे पर जाते हैं। अधिक क्षति की स्थिति में पत्ते कंकलीय रूप में परिणत हो जाते हैं और उनका रंग सफेद हो जाता है।

 

 

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CRRI
10
Oct

Rice Leaf roller राइस लीफ रोलर

1. लीफरोलर या लीफ फोल्डर (Cnaphalocrocis medinalisi) उच्चभूमि और

 निम्नभूमि चावल की फसलों में पाया जाने वाला सामान्य कीट है।

2. लार्वा पत्र फलक के किनारे को बांधकर उसे मोड़् देता है और उसके अन्दर रहकर मेसोफिल या हरित पदार्थ को खाता रहता है। 

3. लार्वा द्वारा खाए जाने के कारण पत्ती के उत्पादक क्षेत्रफल में कमी आती है और इससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। फसल में इसका अधिक प्रकोप होने से पौधों में सफेद धब्बे के साथ खेत का रुग्ण दिखाई पड़ता है। 

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CRRI
10
Oct

Rice stem borer राइस स्टेम बोरर

1. स्टेम बोरर  (Scirpophaga incertulus) चावल का एक प्रमुख कीट है

और यह इस सारे क्षेत्र में पाया जाता है। मादा मॉथ के अगले डैने चमकीले पीले रंग के होते हैं और प्रत्येक पर एक काला धब्बा होता है। साथ ही पीले बालों वाले एनल टफ्ट भी पाया जाता है।

2. नर कीट के अगले डैने पर काले धब्बे नहीं पाए जाते। अंडे पत्तियों की छोर पर दिए जाते हैं जो पांडु रंग के रोम से ढके होते हैं। प्रत्येक अंडे के ढेर में 20-25 अंडे होते हैं और मादा ऐसे 3-4 अंडों के ढेर उत्पन्न करते हैं।

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ICAR NEH,उमियम
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CRRI
10
Oct

Important pests of meghalaya and manipur मेघालय और मणिपुर के महत्वपूर्ण कीट

इस क्षेत्र में चावल की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण (हानिकारक) कीट:  

1.  स्टेम बोरर 

2.  लीफरोलर

3.  केसवर्म 

4.  आर्मीवर्म

5.  थ्राइप्स

6.  गॉल मिज 

7.  राइस हिस्पा

8.  राइस ईयर कटिंग कैटरपिलर

9.  राइस ग्रीन सेमी लूपर

10. गन्धी बग

11. रूट ऐफिड्स

12. हॉर्न्ड कैटरपिलर

13. स्किपर

14. स्लग कैटरपिलर

 

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Insect pests of rice in meghalaya and manipur मेघालय और मणिपुर में चावल की फसल में लगने कीट

1. जीव-जंतुओं की जितनी भी प्रजातियां हैं उनमें दो तिहाई कीट होते हैं। वे प्रायः सभी प्रकार वातावरण में पाए जाते हैं। यदि जलवायविक दशाएं अनुकूल हों तो वे अपनी संख्या बड़ी तेजी से बढ़ाते हैं। 

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ICAR NEH,उमियम
10
Oct

राइस येलो ड्वार्फ

1. बौनापन और प्रोफ्यूज्ड टिलरिंग के साथ सामान्य क्लोरोसिस

के द्वारा इस रोग को पहचाना जा सकता है। क्लोरोटिक पत्ते सकसमान रूप से हल्के पीले रंग के हो जाते हैं। वयस्क संक्रमित पौधों में प्राय: कल्ले नहीं निकलते अथवा नगण्य कल्ले बिना दानों के निकलते हैं। वृद्धि के बाद की अवस्थाओं में संक्रमित पौधों में कटाई से पहले कोई लक्षण नहीं भी दिखाई पड़ सकते हैं। 

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ICAR NEH, Umiam
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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

राइस टुंग्रो वाइरस (Rice tungro virus)

1. यह रोग 1969 और 1970 के दौरान उत्तर-पूर्व के राज्यों में महामारी

के रूप में पाया गया है। यह सबसे हानिकारक रोगों में से एक है। टुंग्रो से पौधे की वृद्धि रुक जाती है और पत्ते का रंग पीले से लेकर नारंगी रंग के अनेक शेड का होता है। बदरंगता और जंग जैसे धब्बे पत्ते के ऊपरी भाग से नीचे की ओर फैलता जाता है। 

2. युवा पत्ते भी चित्तीदार दिखाई पड़ते हैं और हल्के मुड़े होते हैं जबकि, पुराने पत्ते जंग जैसे रंग के हो जाते हैं।  

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ICAR NEH, Umiam
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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

बैक्ट्रियल लीफ स्ट्रीक

1. यह एक बैक्ट्रियल फोलियर रोग है। यह रोग 1-10 सेमी लंबी जल

से फूला हुआ और पारभाषी इंटरवेनियल धारियों के रूप में सबसे पहले पत्तों से आरंभ होता है। ये शिराओं के समांतर फैलते हैं और पीले-भूरे रंग में बदल जाते हैं जो आगे एक होकर बड़े जख्म के धब्बे बन जाते हैं और पत्तों के संपूर्ण सतह पर फैल जाते हैं। 

यह रोग Xanthomonas campestris pv. Oryzicola नामक सूक्ष्मजीवी के कारण होता है। 

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ICAR NEH, Umiam
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