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Crop Protection with vernacular Names

Crop Protection with vernacular Names
24
Aug

ब्लास्ट रोग का प्रबंधन ( Management of blast disease)

A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें।
B) रासायनिक नियंत्रण
1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए।
2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें।

File Courtesy: 
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्लास्ट रोग के लक्षण ( Symptoms of blast disease)

File Courtesy: 
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
Image Courtesy: 
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

1. कारक जीव – मैग्नापोर्था ग्राइसिया का प्रकोप उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत अधिक है।
2. यह रोग फसल को उसके विकास के हरेक चरणों में प्रभावित करता है जैसे नर्सरी, टिलरिंग और फूलों की अवस्था में।
3. किस्म और पर्यावरण की स्थिति के अनुसार फसल उत्पादन में 36-50% तक की क्षति होती है।

File Courtesy: 
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण की रासायनिक विधियां

रासायनिक

जिन यौगिकों की रासायनिक क्रिया से चूहे मारे जा सकते हैं उन्हें रोडेन्टिसाइड्स करते है। ये ज़हरीले रोडेन्टीसाइड्स दो समूहों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं।

File Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण की जैविक विधियां

रोडेन्ट नियंत्रण की जैविक विधियां

a. परभक्षी : चूहों के लिए साँप और नेवले बहुत जाने-माने परभक्षी हैं। चूहे के बिल के पास बाँस के डंडे रोपना। उल्लू, चील आदि पक्षी उन बाँस पर बैठते हैं और जैसे ही चूहा बाहर आता है वे झपट कर उसे मार देते हैं। घर में बिल्लियां पालने से भी चूहों की संख्या काबू में रखी जा सकती है।

b. परजीवी रोडेन्ट नियंत्रण के लिए साल्मोनेल्ला प्रजाति के वाइरस का उपयोग किया जा सकता है लेकिन उससे अन्य अलक्षित प्राणियों को खतरा होने के कारण उसकी सलाह नहीं दी जाती है।

File Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

रोडेन्ट नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

a. गहरी जुताई : 18” (45 सेमी) तक की गहरी जुताई से चूहे के बिल खुल जाएंगे और वे सीधे अपने दुश्मनों जैसे कुत्ता, बिल्ली, कीट आदि के सामने आ जाएंगे। लेकिन यह सब बुवाई शुरू करने से पहले ही किया जा सकता है। अपनी उच्च प्रजनन क्षमता के कारण वे अपनी संख्या बहुत जल्दी उसी स्तर पर पहुंचा सकते हैं।

b. खेतों में पानी भरना : खेतों में बने बिलों में पानी भरा जा सकता है। उससे चूहे मर जाएंगे।

c. संकरी बंड का निर्माण : रोडेन्ट बिल बनाने के लिए चौड़ी बंड पसंद करते हैं।

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण की मैकेनिकल विधियां

रोडेन्ट नियंत्रण की मैकेनिकल विधियां

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण की भौतिक विधियां

रोडेन्ट नियंत्रण की भौतिक विधियां

File Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण

रोडेन्ट नियंत्रण

रोडेन्ट नियंत्रण के लिए निम्न विधियां अपनाई जा सकती हैं-

  • गैर रासायनिक और
  • रासायनिक

I. गैर-रासायनिक विधियों में शामिल है

  • भौतिक विधियां
  • मैकेनिकल
  • परंपरागत
  • जैविक

II. रासायनिक विधियों में शामिल है  

  • सटीक/ एक खुराक में मारने वाले ज़हर
  • दीर्घकालिक/ अनेक बार ज़हर देना
  • चूहों के बिलों में धुआं करना
File Courtesy: 
चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर
23
Aug

छोटे घूस (बैंडिकूट)

छोटे बैंडिकूट, छछुंदर, लघु बैंडिकूट, बाहरी चूहे, बैंडिकोटा बेंगैलेन्सिस

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चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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http://www.itsnature.org/ground/mammals-land/long-nosed-bandicoot/
23
Aug

नॉर्वे चूहा

नॉर्वे रैट, भूरा चूहा, गटर का चूहा, जहाज का चूहा, रैटस नॉर्वेजिकस

नुकसान का प्रकार : अनाज खाते हैं. भंडार की वस्तुओं जैसे बैग्स/डब्बों आदि को नुकसान पहुंचाते हैं। अपने उत्सर्जन, मल और बालों से अनाज को दूषित करते हैं। कई तरह की बीमारियां फैलाते हैं। इनकी बीट समूह में पाई जाती है और तकलीनुमा होती है।

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चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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http://nematode.unl.edu/norwayrat.htm
23
Aug

घरेलू चूहा

घरेलू चूहा, मुस मुस्कुलस

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चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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http://bioweb.uwlax.edu/bio203/s2009/smith_meg2/
23
Aug

घरेलु चुहिया

घरेलु चुहिया

घरेलू चुहिया, रुफ़ रैट, काली चुहिया, रैटस रैटस

नुकसान का प्रकार : यह हर तरह की खाद्य सामग्री खा सकती है और लकड़ी, प्लास्टिक, रबड़ और यहां तक कि मुलायम धातुओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है। चूंकि प्लेग के लिए भी यही ज़िम्मेदार है, इसलिए इसे भारत की सबसे नुकसानदायी चुहिया माना जाता है। सामान्यतया इसकी बीट इधर-उधर बिखरी पाई जाती है और वह केले की आकृति की होती है।

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C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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http://www.mouse-rat.com/
23
Aug

रोडेन्ट (चूहे) से नुकसान और उसका प्रबंधन

रोडेन्ट (चूहे) से नुकसान और उसका प्रबंधन

फसलों को, विशेषकर चावल की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले गैर-कीट श्रेणी के प्राणियों में रोडेन्ट मुख्य हैं। रोडेन्ट कशेरुकी (वर्टिब्रेटा) होते हैं और वे निम्न से संबंधित होते हैं-

वर्ग: मैमलिया और

श्रेणी: रोडेन्टिया।

चूहे के प्रकार

1. घरेलू चुहिया

2. घरेलू चूहे

3. नॉर्वे मुषक

4. छोटे घूस (बैंडिकूट)

5. बड़े घूस (बैंडिकूट)

File Courtesy: 
चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

रासायनिक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) पैकेज

रासायनिक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) पैकेज

  • गुइनैलफोस मिथाइल पैराथियॉन, फोरेट और सिंथेटिक पाइटोथ्रॉइ्डस जैसे कीटनाशकों का प्रयोग कर कीटों पुनरुत्थान होने से रोकें।
  • आवश्यकतानुसार सुझाव दी गई खुराक अनुसार कीटनाशकों का प्रयोग।

पौधे संबंधी उत्पाद

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

जैविक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) पैकेज

जैविक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) पैकेज

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

सांस्कृतिक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) के तहत किए जाने वाले कार्य

सांस्कृतिक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) के तहत किए जाने वाले कार्य

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

एकीकृत कीट प्रबंधन की शक्तियां (गुण)

कीकृत कीट प्रबंधन की शक्तियां (गुण)

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

एकीकृत कीट प्रबंधन की सीमाएं (अवगुण)

एकीकृत कीट प्रबंधन की सीमाएं (अवगुण)

संस्थागत सीमाएं: फैक्लटी के बीच आपस में समन्वय की कमी की तरह शोध वैज्ञानिकों में संस्थागत बाधाएं।

सूचनात्मक सीमाएं: किसानों में आई.पी.एम तकनीकी की कमी।

सामाजिक सीमाएं: कीटनाशक के प्रयोग के लिए अधिकतर किसानों में समन्वय की कमी,समाज में समन्वय की कमी।

आर्थिक सीमाएं: क्रेडिट पर कीटनाशकों प्राप्त करने के लिए और कीट नियंत्रण विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान दुकानदारों या कीटनाशक के डीलरों पर निर्भर होते हैं।

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

एकीकृत कीट प्रबंधन के उद्देश्य, रणनीतियां

एकीकृत कीट प्रबंधन के उद्देश्य

  • कीटों का मूलनाश करने के बजाए उन्हें ई.टी.एल स्तर से कम पर रखना।
  • जैव-विविधता सहित पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण।
  • छोटे किसानों के लिए भी पौधों की सुरक्षा संभव, सुरक्षित और आर्थिक बनाए रखना।

एकीकृत कीट प्रबंधन की रणनीतियां

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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