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Diseases

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24
Aug

शीथ ब्लाइट डिसीझ (पर्णकरपा) मुळे झालेल्या नुकसानीची लक्षणे - Damage symptoms of Sheath Blight disease ( Parnkarpa)

1. पर्णकोशावर एक किंवा एकाहून जास्त वाजवीपेक्षा मोठे, लांबट किंवा वेडेवाकडे लांबट डाग (चट्टे) आढळणे. रोगाच्या पुढच्या अवस्थेत डागाच्या मध्यभागी जांभळी-तपकिरी बाह्यरेखा असलेला फिका डाग उद्भवतो.

2. हे डाग सुरूवातीला पांढरे असतात परंतु नंतर गडद तपकिरी रंगाचे बनतात.

3. गंभीर स्थितीमध्ये पाने वाळू लागतात.

File Courtesy: 
आरएआरएस कर्जत
24
Aug

शीथ ब्लाइट डिसीझ (पर्णकरपा) – अधिक माहिती - Details of Sheath Blight disease ( Parnkarpa)

आढळण्याचा काळ: ओंब्यांपासून दाणा दुधी होईपर्यंत
उत्पादनाचे नुकसान: वार्षिक सरासरी 20 ते 50%
इतर बाधित पिके: हाती असलेल्या माहितीनुसार ऊस, घेवडा, सोयाबीन, टोमॅटो, वांगी, तंबाखू, शिंगाडा (वॉटर हायसिंथ) , hyaसेinth bean आणि हिरवे मूग ह्या पिकांवरही हा रोग वाढू शकतो (अल्टरनेट होस्ट)
रोग वाढण्यासाठी योग्य परिस्थिती:
जास्त तापमान (28-32°से), जास्त तुलनात्मक आर्द्रता (>96%), वारंवार पाऊस, नत्र-खतांचे जास्त प्रमाण आणि रोपे जवळजवळ लावणे
फैलावाचे मार्ग: बियाणे, माती, वारा, पाणी.

File Courtesy: 
आरएआरएस कर्जत
24
Aug

शीथ ब्लाइट डिसीझ (पर्णकरपा) - Sheath Blight disease ( Parnkarpa)

1. कोणत्या जीवाणूमुळे होतो: रायझोक्टोनिया सोलानी कुम
2. मराठी नाव: पानकरपा
3. शीथ ब्लाइट हा बुरशीजन्य रोग आहे, कटिबंधीय प्रदेशांत, कोरड्या मोसमाच्या तुलनेने, पावसाळ्यात तो जास्त प्रमाणात आढळतो.
4. जेथे जलसिंचनाची चांगली सोय आहे अशा ठिकाणी हा रोग जास्त आढळतो.
5. पर्णकोश नष्ट होत असल्याने ह्याला शीथ ब्लाइट असे म्हणतात..

File Courtesy: 
आरएआरएस कर्जत
24
Aug

राइस ब्लास्ट डिसीज (करपा रोग) का आणि केव्हा होतो - Why and when it occurs for Rice blast disease ( Karapa)

खूप दिवस पाऊस पडल्यानंतर किंवा वारा पडलेला असताना आर्द्रता जास्त झाल्यास किंवा वारा पडलेला असून रात्री गरम असताना (63-73°फॅ किंवा 18-23°से) हा रोग जास्त फैलावतो. कारण अशा वातावरणात बीजकणांची निर्मिती आणि वाढ चटकन होते. खाचरे सतत पाण्याने भरलेली ठेवल्याने आणि गार वार्याापासून पिकाचा बचाव केल्यास ही बुरशी आटोक्यात राहते.

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आरएआरएस कर्जत
24
Aug

राइस ब्लास्ट डिसीज (करपा रोग) – प्रतिबंध आणि उपाय - Prevention and Treatment for Rice blast disease ( Karapa)

संर्धनात्मक क्रियांमध्ये रोगट पीक पूर्णपणे नष्ट करणे, नत्रयुक्त खते जपून वापरणे (जास्त नत्रामुळे हा रोग वाढतो), ड्रिल पद्धतीपेक्षा वॉटर पद्धतीने रोपे बनवणे, खाचरे सतत पाण्याने भरलेली ठेवणे इ. चा समावेश होतो. तसेच रोगाला विरोध करणार्याक जाती लावाव्या.
रासायनिक उपाय: बियाण्यावर लावणीपूर्वी थायरम @ 3 ग्रॅम/किग्रॅ आणि पायरोफ्यूरॉन @ 4 ग्रॅम/किग्रॅ ची प्रक्रिया करावी. रोग आढळल्याबरोबर दर लिटरी 1 मिली. एडिफॉन्फॉस किंवा 1 ग्रॅम कार्बेंडॅझिमची प्रक्रिया करण्याची शिफारस केली जाते.

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आरएआरएस कर्जत
24
Aug

राइस ब्लास्ट डिसीज (करपा रोग) – लक्षणे - Symptoms of Rice blast disease ( Karapa)

सर्वप्रथम पानांवर तसेच खोडावर लंबगोलाकार करडे-पांढरे डाग उद्भवतात आणि पानाच्या कडा लालसर होतात (करपणे). हे डाग पाने किंवा खोडाच्या लांबीला समांतर असतात. रोपाला जेथे ओंबी फुटणार असते त्या ठिकाणी रोग पोहोचला की सर्वाधिक नुकसानीला सुरूवात होते कारण ओंबीची मानच मोडल्याने ती तुटून पडते (रॉटन नेक). तसेच ह्या रोगामुळे दाणा भरण्याची क्रिया होऊच शकत नाही (पॅनिकल ब्लास्ट). अनेकदा पिकाचे नुकसान 50% पर्यंतही पोहोचू शकते..

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आरएआरएस कर्जत
24
Aug

राइस ब्लास्ट डिसीज (करपा रोग) पसरवणार्याा जीवाणूचे वर्णन ( Description of the Agent of Rice blast disease ( Karapa)

1. पा. ओरिझी ही ऍस्कॉमसाइट प्रकारची सॅक फंगी कुळातील एक बुरशी (फंगस) आहे.
2. ह्या बुरशीचे एक वैशिष्ट्य म्हणजे ती कोनिडिया किंवा कॉँडिओस्पोरस नावाचे बीजकण तयार करते. ते वार्या्बरोबर तसेच पावसाच्या थेंबांबरोबर सहजपणे सगळीकडे पसरू शकतात.
3. हे बीजकण तांदळाच्या दाण्यांमध्ये तसेच फोलपटांमध्ये बराच काळ राहू शकत असल्याने पुढील वर्षीच्या नव्या पिकावर परिणाम होऊ शकतो. रोगट रोपात तयार झालेले कोनिडिया आणखीनच पसरतात.

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आरएआरएस कर्जत
24
Aug

राइस ब्लास्ट डिसीज (करपा रोग) ( Rice blast disease ( Karapa))

1. कोणत्या जीवाणूमुळे होतो: पायरिक्युलारिया ओरिझी

2. मराठी नाव: करपा

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आरएआरएस कर्जत
24
Aug

रोग का प्रबंधन ( Management of disease)

पैनिकल इनिशियएन में 0.1% कार्बेन्डैजिम 50 WP के एक या दो छिड़काव करने से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

लीफ स्कैल्ड (पत्तियों का जलना) ( Leaf scald)

लक्षण:
1. यह रोग रिन्कोस्पोरियम ओराइजी के कारण होता है;

2. गहरे और हल्के भूरे क्षेत्रों के साथ पत्तियां मुरझा जाती हैं।

3. लक्षण पत्ती के सिरे या किनारे पर दिखने शुरू होते हैं।

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्राउन स्पॉट रोग का प्रबंधन ( Management of brown spot)

मिट्टी की उर्वरता की कमी में सुधार कर और संतुलित पोषण का प्रयोग कर इस रोग से बचा जा सकता है।

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्राउन स्पॉट रोग ( Brown Spot disease)

लक्षण: इस रोग का मुख्य कारण हेल्मिन्थोस्पोरियल ओराइजी होता है। यह पत्तियों और प्लूम पर अंडाकार गहरा भूरा दाग बनाता है।
यह रोग मुख्यतः पोषकहीन और कमजोर मिट्टी में पाया जाता है। गंभीर स्थिति में यह नर्सरी व खेत की फसलों को हानि पहुंचा सकता है।

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्लास्ट रोग का प्रबंधन ( Management of blast disease)

A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें।
B) रासायनिक नियंत्रण
1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए।
2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें।

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्लास्ट रोग के लक्षण ( Symptoms of blast disease)

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
24
Aug

ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

1. कारक जीव – मैग्नापोर्था ग्राइसिया का प्रकोप उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत अधिक है।
2. यह रोग फसल को उसके विकास के हरेक चरणों में प्रभावित करता है जैसे नर्सरी, टिलरिंग और फूलों की अवस्था में।
3. किस्म और पर्यावरण की स्थिति के अनुसार फसल उत्पादन में 36-50% तक की क्षति होती है।

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सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
22
Aug

चावल का फॉल्स स्मट

चावल का फॉल्स स्मट

लक्षण: फंगस अनाज के अलग-अलग दाने को मखमली हरे बॉल के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। रोगजनकों के बीजाणुओं के विकास के कारण अंडाशय वृहत्त मखमली गरे द्रव के रूप में दिखते हैं। सामान्य तौर पर कुछेक स्पाइकलेट्स ही प्रभावित हो पाते हैं।

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
Image Courtesy: 
Dr. Krishnaveni, DRR
22
Aug

चावल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी) का प्रबंधन

चावल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी) का प्रबंधन

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

चावल का बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी)

चावल का बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी)

जैन्थोमोनस ओराइजी पी.वी ओराइजी

लक्षण:

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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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Dr. Krishnaveni, DRR
22
Aug

चावल में शीथ ब्लास्ट का प्रबंधन

चावल में शीथ ब्लास्ट का प्रबंधन

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
22
Aug

चावल में शीथ ब्लास्ट के विस्तार का प्रकार और उसका जीवन

रोगजनक स्क्लेरोटिया या माइसिलियम के रूप में सूखी मिट्टी में लगभग 20 महीने तक जीवित रह सकते हैं लेकिन नम मिट्टी में 5-8 माह तक ही जीवित रह सकते हैं। 32 परिवार के फसल की 188 प्रजातियों से भी अधिक को यह संक्रमित कर देता है। स्क्लेरोटिया सिंचाई के पानी के माध्यम से फैलता है।

अनुकूल परिस्थितयां: उच्च सापेक्षिक आर्द्रता (96-97 प्रतिशत), उच्च तापमान (30-32 oC), पास में में पौधो को रोपा जाना और नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का अधिक मात्रा में प्रयोग।

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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