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Diseases

Diseases
11
Oct

शीथ रॉट

कारणात्मक जीव - मॅग्नापोर्थे सैल्विनिटी               

लक्षण

1. जुताई के पश्चात धान संक्रमित हो जाता है। 

2. आरंभिक संक्रमण पत्ती के कोष में तने पर एवं परिपक्वता की ओर जाते हुए नाल में व्याप्त हो कर ठहराव उत्पन्न कर देता है। 

11
Oct

बॅक्टेरियल लीफ़ ब्लाइट (बीएलबी)

जीवाणु पत्ती पाला के लक्षण                                                

1. क्रॅस्क प्रारंभिक चरण (पौधा मुरझाता एवं सूख जाता है) में होता है, उत्तरकालीन चरण में पाला पत्तियों की नोक से शुरू होते हुए नीचे तक आता है, पीले पुआल, आंशिक रूप से भरा अनाज।

प्रबंधन

1. संतुलित उर्वरक खुराक का उपयोग करें।

11
Oct

राइस ब्लास्ट

स्थानीय नाम :                                                                      

कारणात्मक जीव : मॅग्नापोर्थे ग्रिसिया

10
Oct

राइस येलो ड्वार्फ

1. बौनापन और प्रोफ्यूज्ड टिलरिंग के साथ सामान्य क्लोरोसिस

के द्वारा इस रोग को पहचाना जा सकता है। क्लोरोटिक पत्ते सकसमान रूप से हल्के पीले रंग के हो जाते हैं। वयस्क संक्रमित पौधों में प्राय: कल्ले नहीं निकलते अथवा नगण्य कल्ले बिना दानों के निकलते हैं। वृद्धि के बाद की अवस्थाओं में संक्रमित पौधों में कटाई से पहले कोई लक्षण नहीं भी दिखाई पड़ सकते हैं। 

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ICAR NEH, Umiam
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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

राइस टुंग्रो वाइरस (Rice tungro virus)

1. यह रोग 1969 और 1970 के दौरान उत्तर-पूर्व के राज्यों में महामारी

के रूप में पाया गया है। यह सबसे हानिकारक रोगों में से एक है। टुंग्रो से पौधे की वृद्धि रुक जाती है और पत्ते का रंग पीले से लेकर नारंगी रंग के अनेक शेड का होता है। बदरंगता और जंग जैसे धब्बे पत्ते के ऊपरी भाग से नीचे की ओर फैलता जाता है। 

2. युवा पत्ते भी चित्तीदार दिखाई पड़ते हैं और हल्के मुड़े होते हैं जबकि, पुराने पत्ते जंग जैसे रंग के हो जाते हैं।  

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ICAR NEH, Umiam
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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

बैक्ट्रियल लीफ स्ट्रीक

1. यह एक बैक्ट्रियल फोलियर रोग है। यह रोग 1-10 सेमी लंबी जल

से फूला हुआ और पारभाषी इंटरवेनियल धारियों के रूप में सबसे पहले पत्तों से आरंभ होता है। ये शिराओं के समांतर फैलते हैं और पीले-भूरे रंग में बदल जाते हैं जो आगे एक होकर बड़े जख्म के धब्बे बन जाते हैं और पत्तों के संपूर्ण सतह पर फैल जाते हैं। 

यह रोग Xanthomonas campestris pv. Oryzicola नामक सूक्ष्मजीवी के कारण होता है। 

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ICAR NEH, Umiam
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http://www.scienceफ़ोटो:library.com/images/download_lo_res.html?id=670017710
10
Oct

बैक्ट्रियल लीफ ब्लाइट के नियंत्रण के उपाय

1. कॉपर फंगीसाइड (Blitox 0.3%) से बारी-बारी Streptocycycline (250 ppm) के साथ छिड़काव करें। 

2. नाइट्रोजन ऊर्वरक का हल्का (80  kg/ha) इस्तेमाल और पौधों की दूर-दूर (30 x 15 cm) रोपाई करें।

3. रोग के प्रति प्रतिरोधी प्रजातियों की खेती करें। 

 

 

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ICAR NEH, Umiam
10
Oct

अनाजों पर धब्बे

1. चावल के दानों पर धब्बा, ऊंची भूमि और नीची भूमि दोनों की कुछ प्रजातियों में एक प्रमुख समस्या है। यह अंकुरण को कम करता है, जिससे बिचड़ों का क्षय होता है, तुषमय अनाज होते हैं और अनाज अखाद्य हो जाते हैं।  

2. खराबी एक दानें तक भी सीमित रह सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में लगभग संपूर्ण पुष्प-गुच्छ के साथ-साथ प्राक्ष भी बदरंग हो जाते हैं। 

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ICAR NEH, Umiam
10
Oct

बंट (कृष्णिका)

1. इस रोग में, बाले के कुछ दानें प्रभावित होते हैं, संक्रमण आंशिक अथवा पूर्ण रूप से हो सकता है। इसका पहला लक्षण फसल पकने के समय ग्लूम से होकर काली धारियों के रूप  में दिखाई पड़ता है। 

2. संक्रमित दानों को चुटकी से मसलने पर बीजाणु के काले पाउडर बाहर निकलते हैं। इस रोग का कारण Tilletia barclayana नामक जीवाणु है।  

3. दानों के अन्दर भरे बीजाणु में बढ़ता है, जो गोलाकार काले रंग का होता और साथ ही कंटीला एपिस्पोर होता है। बीजाणु से स्पोरैडिक का जन्म होता है। ये द्वितीयक स्पोरैडिक को भारी मात्रा में जन्म देते हैं।  

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ICAR NEH, Umiam
10
Oct

पत्तों पर संकरे भूरे रंग के धब्बे

1. यह भी के मामूले रोग है और भूरे से लेकर काले रंग के रेखीय धब्बे पत्तों

पर दिखाई देते हैं। धब्बे पत्ते के आवरण, ग्लूम, और तने के भागों पर दिखाई दे सकते हैं। 

2. यह रोग Cercospora oryzae के कारण होता है। रोगाणु कोनीडिया का निर्माण करता है जो  hyaline या काले, फिलिफॉर्म और अनेक कोशिकाओं वाला होता है।  

3. संक्रमित पौधे का कचरा इस रोग का प्राथमिक स्रोत है और पत्ते पर निर्मित कोनीडिया वायु द्वारा फैलकर संक्रमण फैलाता है।  

नियंत्रण: 

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ICAR NEH, Umiam
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http://www.insectimages.org/browse/detail.cfm?imgnum=5390516
10
Oct

लीफ स्मट

1. यह एक मामूली रोग है और यह पत्तों पर छोटे-छोटे, कज्जलकारी,

धुंधला, भद्दे पट्टियों के रूप में दिखाई पड़ता है जो सोरी (sori) को दर्शाता है। आसानी से प्रभावित होने वाली प्रजातियों में, फंगस पुराने पत्तों के लगभग संपूर्ण भाग पर फैले होते हैं। 

2. इस रोग का कारण Entyloma oryzae है, जो tel iospores को जन्म देता है और कोणीय आकृति से लेकर गोलियों की आकृति वाला, चिकने परत वाला, हल्के भूरे रंग का होता है। 

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ICAR NEH, Umiam
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http://www.ipmimages.org/browse/detail.cfm?imgnum=5390514
10
Oct

स्टैक बर्न

1. रोग के लक्षण अंकुर, वयस्क पौधों के पत्तों, और दानों पर वृत्तीय से लेकर दीर्घाकार गहरे भूरे धब्बे के रूप में प्रकट होते हैं जो बाद आगे चलकर आपस में मिलकर बड़े धब्बे बन जाते हैं। गंभीर मामलों में, बिचड़े मुरझा जाते हैं और पत्तों पर छोटे-छोटे काले धब्बे उभर आते हैं जो गोलाकार फंगस के पिंड के रूप में होते हैं। अनाजों पर, हल्के भूरे से लेकर गेहूं रंग के जख्म दिखाई पड़ते हैं जो गहरे काले किनारों से घिरे होते हैं और दाने रंगहीन हो जाते हैं।  

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ICAR NEH, Umiam
10
Oct

False smut

1. इस रोग की मौजूदगी के बारे में यह मत है कि यह अच्छे साल

को दर्शाता है क्योंकि अनुकूल मौसम में ही इसका विकास होता है और उपज भी बेहतर होता है। यह रोग दानों पर प्रकट होता है और एक अंडाशय बड़े मखमली हरे ढ़ेर से स्क्लेरोशियल पिंड में तब्दील हो जाता है। चूंकि यह स्मट सोरी जैसा दीखता है, इसलिए इसका नाम फाल्स स्मट रखा गया है। बाली में कुछ दाने ही संक्रमित होते हैं।  

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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

शीथ रॉट (पत्ते के आवरण का गलना)

पहले इस रोग को मामूली रोग माना जाता था, लेकिन अब देश

के उत्तर-पूर्व के चावल उगाने वाले क्षेत्रों में यह प्रमुख रोग के रूप में उभर आया है। धब्बे पुष्प-गुच्छ को आवृत्त करने वाले बससे ऊपरी पत्ते के आवरण पर विकसित होते हैं और अनियमित किनारों वाले भूरे रंग के होते हैं। युवा पुष्प-गुच्छ पत्ते के आवरण में रहते हैं अथवा केवल आंशिक रूप से बाहर निकलते हैं। दाने भरे हुए नहीं रहते हैं अथवा बदरंग होते हैं। गंभीर मामलों में, पुष्प-गुच्छ सढ़ भी जाते हैं। 

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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

उदबट्टा रोग

मेघालय के नोंगपोह में यह रोग सबसे पहले देखा गया और बाद में

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CRRI
10
Oct

कोष में पाला (Sheath blight)

हाल में उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में इस रोग को बहुत गंभीर माना गया है।

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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
10
Oct

पत्ते का जलने का दाग

1. उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों में फसल के वयस्क अवस्था में यह रोग

पाया जाता है। पत्ते के ऊपरी भाग पर इसका प्रारूपी लक्षण प्रकट होता है। क्षति शीर्ष अथवा किनारे से आरंभ होती है और गहरे भूरे अथवा हल्के पीले क्षेत्रों के रूप में दीर्घाकार हो जाती है। 

2. यह रोग Rhynchosporium oryzae के कारण होता है। रोगानु से कोनीडिया का निर्माण होता है जो hyaline, 2-सेलों वाला और शीर्ष सेल पर असमान लघु पार्ष्व चोंच होता है। 

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10
Oct

‘भूरे धब्बे’ रोग के नियंत्रण के उपाय

1. चूंकि रोग बीजजनित है, इसके Thiram @ 2 ग्रा/किग्रा के साथ की उपचार करने से प्रभावकारी नियंत्रण प्राप्त होता है।  

2. नाइट्रोजन के तीन अलग-अलग प्रयोगों और मिट्टी में पोषक-तत्वों की कमी को पोटाश, मैंगनीज़ और जिंक द्वारा पूरा करने से नियंत्रण में पदद मिलती है।  

3. चूना डाला कर मिट्टी की अम्लीयता को खत्म कर रोग को कम किया जा सकता है।

4. HYVs का इस्तेमाल रोग के लिए प्रतिरोधी होता है। 

5. 0.1 % Hinosan 50 EC या 0.2% Dithane M-45 (75 WP) को 0.1 % Sandovit में मिलाकर छिड़काव करने से रोग नियंत्रण में मदद मिलती है।  

 

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ICAR NEH, Umiam
10
Oct

राइस ब्राउन स्पॉट (भूरे रंग के धब्बे)

1. इस रोग के कारण नर्सरी में बिचड़े कुम्हला जाते हैं और

खेतों में पत्ते मुरझा जाते हैं। 

2. धब्बे गहरे भूरे रंग का और अंडाकार होता है; गंभीर मामलों में वे साथ मिलकर बड़ी सी पट्टी बना डालते हैं। यह रोग प्राय: त्रुटिपूर्ण और खराब मिट्टी में पाया जाता है और इसे प्राय: ‘गरीब आदमी का रोग’ कहा जाता है।          

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डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
7
Oct

राइस ब्लास्ट के नियंत्रण के उपाय

1. विनाशकारी खर-पतवार खेत के मेढ़ों/ऊपरी स्तर पर मौजूद रहते हैं।  

2. निम्न रोग प्रबलता वाले उच्च पैदावार के लिए ऊर्वरक NPK @ 60:60:40 का प्रयोग करें और तीन अलग-अलग खुराकों में नाइट्रोजन का इस्तेमाल करें। i) बुआई के एक सप्ताह बाद, ii) कल्ले निकलने के समय और iii) फूल निकलने के समय।  

3. बुआई की तिथियों को व्यवस्थित करें। अगात (अप्रैल – मई) बुआई वाली फसलों में पछात (जून – जुलाई) बुआई वाली सफलों की तुलना में ब्लास्ट डैमेज कम से कम होता है।  

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ICAR NEH, Umiam
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