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Chhattisgarh

11
Oct

कृतेक-प्राणी (कुतरनेवाले) प्रबंधन

• गॉंवों में खेत एवं घरों के चूहे भी एक गंभीर समस्यार है, क्यों कि ये अनाज को क्षति पहुँचाते हैं एवं मिट्टी से बने घरों को भी इनसे नुकसान पहुँचता है।

• यह भी कहा जाता है कि इनके कारण घरों मे विषैले सॉंप भी आ जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में इन्हें  आग में भूनकर खाया जाता है, चूहों का शिकार करना छत्ती्सगढ़ के कुछ क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है। 

• चूहों पर नियंत्रण पाने के लिये प्रयोग में लाये जानवाले कुछ स्व देशी उपाय:

1. बाजार में उपलब्‍ध पिंजरों को प्रयोग करना

2. घरों में बिल्लीा पालना

11
Oct

इकिनोक्‍लोआ क्रसगॅली

वानस्‍पातिक नाम: इकिनोक्‍लोआ क्रसगॅली

स्‍थानीय नाम: बड़ा सावा

वर्णन: पत्‍ते-पंक्तिरूप एवं लंबाग्र, प्राय: 25 मि.मि.लंबे और 2-17 मि.मि.चौड़े एवं इनकी कल्मे् सीधी तनी हुई एवं खड़ी (1 से 2 मीटर ऊँची) होती हैं। तने सीधे तने हुए, ऊँचाई 30 से 90 से.मी. या अधिक. पुष्‍पविन्‍यास: तूडीदार नुकीले शूल लगभग 3.5 मि.मि.केशयुक्त , दूसरे शूल पर शाखानुमा लंबाकार पुष्पोंब का गुच्छा0, 3-5 क्रमानुसार, लगभग बिना डंठल का, 4 तूष, 2.5-20 मि.मि. लंबाई, वर्षा ऋतु में फूल एवं फल आते हैं।

11
Oct

इकिनोक्‍लोआ कोलोना

वानस्‍पातिक नाम: इकिनोक्लोाआ कोलोना    

स्‍थानीय नाम : छोटा सावा

11
Oct

'इंदिरा राजेश्वटरी' प्रजाति के लिये पध्द तियों का पॅकेज

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छी  तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्य क है जिस से कि खरपतवार खेत में अच्छीे तरह से मिल जायें। 

पौधशाला प्रबंधन एवं प्रत्यातरोपण: 

11
Oct

'दुर्गेश्वकरी' प्रजाति के लिये पध्दनतियों का पॅकेज

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छी  तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्यशक है जिस से कि खरपतवार खेत में अच्छीे तरह से मिल जायें। 

पौधशाला प्रबंधन एवं प्रत्यातरोपण: 

11
Oct

'इंदिरा बरानी धान-1' प्रजाति के लिये पध्दपतियों का पॅकेज

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई कर के खेत की तैयारी करनी चाहिये। 

क्रमागत बुवाई: 

अच्छाु हो कि इस प्रजाति को सीधी सीध में पंक्तियों में 20 सें.मी. की दूरी रखते हुए बुवाई की जाये। बीज दर 70-80 कि.ग्रा./हेक्टे यर बनाये रखा जाना चाहिये। बीज का उपचार बाविस्टिन के साथ किया जाना चाहिये। 

• उच्‍च मात्रा में फसल प्राप्त  करने के लिये मिट्टी में 10 t/ha FYM मिला लेना चाहिये।

• प्रत्‍यारोपण की गहराई 5-6 सें.मी. से अधिक नहीं होनी चाहिये। 

11
Oct

'माहेश्वकरी' प्रजाति के लिये पध्ददतियों का पॅकेज

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छीे तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्य क है जिस से कि खरपतवार खेत में अच्छीर तरह से मिल जायें। 

पौधशाला प्रबंधन एवं प्रत्यासरोपण: 

11
Oct

Package of practices for variety “Danteshwari” ( For Kharif Season)

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छीF तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्य क है जिससे कि खरपतवार खेत में अच्छीन तरह से मिल जायें। 

बुवाई : 

मानसून के आक्रमण के बाद सीड ड्रिल या नारी हल की मदद से 20 सें.मी. की दूरी पर बुवाई की जाना चाहिये।

बीज दर:

70-80कि.ग्रा./हेक्टेकयर बीजों का प्रयोग एक सीध में बुवाई करने के लिये किया जाना चाहिये।

खरपतवार प्रबंधन:

11
Oct

'दंतेश्वेरी' प्रजाति के लिये पध्दातियों का पॅकेज (गर्मियों की फसल के लिये)

जुताई: खरीफ़ की फसल की कटाई के बाद 2-3 बार जुताई करना आवश्यिक है। 

पौधशाला के लिये बुवाई का समय: 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक

बीज दर: 60-75 कि.ग्रा./हेक्टेकयर

लेही विधि : फेब्रुवारीचा प्रथम आठवडा

बीज दर : 100 कि.ग्रा./हेक्टेरयर

पौधशाला उगाने की विधि

लेही विधि: 

11
Oct

'चंद्रहासिनी' प्रजामि के लिये पध्दयतियों का पॅकेज

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छी  तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्याक है जिस से कि खरपतवार खेत में अच्छीे तरह से मिल जायें। 

पौधशाला प्रबंधन: 

11
Oct

'श्यामला' प्रजाति के लिये पध्दथतियों का पॅकेज

वर्षा आधारित स्थितियों में मध्यतम भूमि के लिये इस प्रजाति की सिफारिश प्रस्ता वित की जाती है।  सत्र में वर्षा अच्छी  न होने पर भी अच्छीर उपज लेने के लिये 1 या 2 पूरक सिचाइयाँ करने पर उच्चा फसल ली जा सकती है। 

पौधशाला: सामान्‍यत: बैसी पध्दचति की सिफारिश की जाती है क्योंिकि प्रत्या रोपित क्षेत्रों में 'करगा' की समस्याय नहीं होती है। 

बीज का चयन: 17% नमक के पानी में बीजों को डुबो कर रखें एवं जो बीज नीचे बैठ जायें उनका चयन करें। 

11
Oct

'इंदिरा-9' प्रजाति के लिये पध्दकतियों का पॅकेज

पौधशाला प्रबंधन:

11
Oct

'जलडुबी' प्रजाति के लिये पध्दगतियों का पॅकेज

पध्‍दतियों का पॅकेज 

पौधशाला प्रबंधन:

11
Oct

'कर्मा महसूरी' प्रजाति के लिये पध्दकतियों का पॅकेज

खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छीे तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्यतक है जिस से कि खरपतवार खेत में अच्छी  तरह से मिल जायें। 

पौधशाला प्रबंधन एवं प्रत्यातरोपण: 

11
Oct

प्रजाति का नाम : श्यामला (आइईटी 12561, आर 259- डबल्यूआर 37-2)

1. उत्पत्ति - आर 60-2713 × आर 238-6  

2. परिपक्वता – 130-135 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - इस प्रजाति ने, अन्य बैंगनी पत्ती की  प्रजातियों (क्रॉस 51 एवं नागकेसर) की तुलना में, प्रमुख कीट एवं रोगों के लिए उच्च प्रतिक्रिया से बेहतर दिखाई है।

5. अजैविक तनाव - अन्य बैंगनी पत्ती की किस्मों की तुलना में सूखा के प्रति बेहतर सहनशीलता।

11
Oct

प्रजाति का नाम : सामलेश्वरी (आर 1027-2282-2-1, आइईटी 17455 आइसी 549668)

1. उत्पत्ति - आर 310-37 × आर 308-6                               

2. परिपक्वता - 120-125 दिन

3. अनाज का प्रजाति - मध्यम महीन अनाज

4. जैविक तनाव - आर से जीएम 1 एवं 4, सामान्य रूप से ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी एवं ब्राउन स्पॉट एवं नैक  ब्लास्ट के प्रति सहनशील। 

11
Oct

जाति का नाम : पूर्णिमा (आर 281-31-1, आइईटी 12284)

1. उत्पत्ति - पूर्वा × आइआर 8608-298                           

2. परिपक्वता - 100-105 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन 

4. जैविक तनाव - प्रारंभिक प्रजाति होने के कारण, यह क्षेत्र स्थिति के अधिकतम रोगों एवं कीटों से बच जाता है।

11
Oct

प्रजाति का नाम : महामाया (आर 320-298, आइईटी 10749)

1. उत्पत्ति - आशा × क्रांति                                        

2. परिपक्वता – 125-128 दिन 

3. अनाज का प्रजाति- लंबा खड़ा अनाज

4. जैविक तनाव - गॉल मिज के लिए प्रतिरोधी एवं डब्यूपीएचबीपीएच, लीफ़ फ़ोल्डर, शीथ रॉट, ब्राउन स्पॉट एवं बीएलबी के प्रति सहनशील।

11
Oct

प्रजाति का नाम : इन्दिरा बारानी धान-1 (आरएफ़-17-38-70, आइईटी 21205)

1. उत्पत्ति - स्वर्ण × आईआर 42253                                         

2. परिपक्वता – 111-115 दिन

3. अनाज का प्रजाति - मध्यम महीन अनाज

4. जैविक तनाव – स्टेम बोरर के लिए मध्यम प्रतिरोधी।

नैक  ब्लास्ट एवं बॅक्टेरियल ब्लाइट के प्रति सहनशील। 

11
Oct

प्रजाति का नाम : दुर्गेश्वरी (आर 1243-1224-578-1, आइईटी 19795)

1. उत्पत्ति - महामाया × एनएसएन 5 (एमटीसी - 4, आइईटी 11904)

2. परिपक्वता – 130-135 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा पतला अनाज

4. जैविक तनाव – 1. लीफ़ ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी।

2.   शीथ ब्लाइट, बॅक्टेरियल ब्लाइट, शीथ रॉट, गॉल मिज एवं राइस टुन्ग्रो के लिए मध्यम प्रतिरोधी/सहनशील।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान - इस प्रजाति की शारीरिक स्तर पर, सूखे के प्रति बेहतर सहनशीलता है।

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